Can Fin Homes के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने कंपनी पर भरोसा जताते हुए ₹1,075 का टारगेट प्राइस दिया है। कंपनी की पहली तिमाही में डिस्बर्समेंट में **29.5%** की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है।
Detailed Coverage
Can Fin Homes में क्यों लगाएं दांव?
Can Fin Homes ने पहली तिमाही में अपने लोन वितरण (Disbursements) में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 29.5% का शानदार इजाफा दर्ज किया है। इस बेहतरीन परफॉर्मेंस के दम पर ही ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने इस स्टॉक पर अपना पॉजिटिव रुख (Positive Outlook) बनाए रखा है और ₹1,075 का टारगेट सेट किया है। कंपनी अपने ब्रांच नेटवर्क और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर इस ग्रोथ को रफ्तार दे रही है।
ग्रोथ और मार्जिन पर क्या है असर?
हालांकि, हाउसिंग लोन की डिमांड मजबूत बनी हुई है, लेकिन कंपनी 4.4% के बढ़ते लोन रन-डाउन रेट (Loan Run-down Rate) से जूझ रही है। इसी वजह से कंपनी के लोन बुक की नेट ग्रोथ अभी 11% के आसपास ही है। ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि हाउसिंग सेक्टर में लगातार बनी डिमांड के चलते वित्त वर्ष 2027 तक कंपनी का लोन बुक 14% और वित्त वर्ष 2028 तक 13% की दर से बढ़ेगा।
कंपनी के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margin) की बात करें तो, यह अगले कुछ वित्तीय सालों में 3.75% के आसपास रहने का अनुमान है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कंपनी अभी बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन और ब्रांच विस्तार पर ज्यादा खर्च कर रही है। इस वजह से कॉस्ट-टू-इनकम रेश्यो (Cost-to-Income Ratio) वित्त वर्ष 2027 तक लगभग 19% पर बना रह सकता है। यानी, कंपनी भले ही ग्रोथ कर रही है, लेकिन इन विस्तार की लागतों के कारण फिलहाल इसकी ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर थोड़ा दबाव है।
एसेट क्वालिटी और आगे क्या देखें?
लंबे समय के निवेशकों के लिए कंपनी की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) यानी बैड लोन की स्थिति एक अहम फैक्टर है। एनालिस्ट्स का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 के लिए क्रेडिट कॉस्ट (Credit Costs) यानी संभावित लोन नुकसान के लिए रखे जाने वाले पैसे 10 बेसिस पॉइंट के निचले स्तर पर बने रहेंगे। यह कंपनी के लोन पोर्टफोलियो की अच्छी क्वालिटी को दर्शाता है।
आगे चलकर शेयरधारकों को लोन बुक की असल ग्रोथ पर नजर रखनी होगी, जो कि अनुमानित 13-14% के लक्ष्य के मुकाबले कैसी रहती है। साथ ही, यह देखना होगा कि बढ़ता लोन रन-डाउन रेट कब तक स्थिर होता है। इसके अलावा, यह भी गौर करना अहम होगा कि कंपनी के नए ब्रांच और टेक्नोलॉजी में किए गए निवेश से ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधरती है या कॉस्ट-टू-इनकम रेश्यो दबाव में ही रहता है।
