Jefferies की एक रिपोर्ट ने मार्केट में खलबली मचा दी है। एआई (AI) की बढ़ती डिमांड के कारण मेमोरी चिप्स की भारी किल्लत हो गई है, जिससे बजट स्मार्टफोन की कीमतों में **30%** तक का उछाल देखने को मिल सकता है।
स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे ग्राहकों के लिए यह खबर चिंताजनक हो सकती है। आने वाले महीनों में एंट्री-लेवल एंड्रॉइड डिवाइस के दाम में 30% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी मुख्य वजह एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग और उसके चलते मेमोरी कंपोनेंट्स की भारी कमी है।
एआई मेमोरी का संकट
सप्लाई चेन में आई इस समस्या का सीधा असर स्मार्टफोन इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। डेटा सेंटर्स में एआई प्रोसेसिंग के लिए हाई-कैपेसिटी मेमोरी चिप्स की जबरदस्त डिमांड है, जिससे इनकी कीमतें आसमान छू रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, $200 से कम कीमत वाले फोन में लगने वाली मेमोरी चिप की लागत साल 2025 के $20 से बढ़कर 2026 में $60 के पार पहुंच गई है। यानी लागत सीधे तीन गुना हो गई है।
कंपनियों पर मार्जिन का दबाव
सस्ती स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के लिए यह स्थिति काफी कठिन है क्योंकि उनका प्रॉफिट मार्जिन पहले ही बहुत कम होता है। अपनी कमाई बचाने के लिए कंपनियां अब इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। भारतीय बाजार में इसका असर यह होगा कि कई बजट मॉडल्स की कीमत में ₹3,000 तक का इजाफा हो सकता है।
बदलता उपभोक्ता व्यवहार
महंगाई और सीमित अपग्रेड्स के कारण लोग अब अपना पुराना फोन ही लंबे समय तक चलाने का मन बना रहे हैं। इसके अलावा, रिफर्बिश्ड और सेकंड-हैंड मार्केट की ओर ग्राहकों का रुझान बढ़ने की संभावना है। यह संकट कम से कम साल 2027 के मध्य तक बने रहने के आसार हैं। निवेशकों के लिए अब कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन और इन्वेंट्री लेवल पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।
