Bank of America के एनालिस्ट्स का मानना है कि आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ क्षमता फिलहाल टेक्नोलॉजी से जुड़े रिस्क से कहीं ज्यादा मजबूत है। फर्म ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे टेक सेक्टर में बने रहें, लेकिन ब्याज दरों से जुड़ी अस्थिरता (Volatility) को देखते हुए हेजिंग (Hedging) जरूर करें।
क्या वाकई 'बबल' बन रहा है?
Bank of America की लेटेस्ट रिपोर्ट में रिस्क पर एक अहम खुलासा हुआ है। फर्म का कहना है कि मौजूदा मार्केट में रिस्क काफी सीमित है और हर जगह 'बबल' जैसे हालात नहीं हैं। S&P 500 इंडेक्स के केवल 12 शेयर ऐसे हैं जो बैंक के 'बबल थ्रेशोल्ड' को पार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि टेक सेक्टर की यह तेजी पिछले दौर के मुकाबले कहीं ज्यादा सिलेक्टिव है।
रिस्क मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजी
मार्केट अभी 'लेट-साइकिल' फेज में है, जहां गिरावट पर खरीदारी का ट्रेंड हावी है। बैंक ने निवेशकों को 'असिमेट्रिक प्रोटेक्शन' (Asymmetric Protection) की सलाह दी है। इसका मतलब है कि टेक स्टॉक्स में लंबी अवधि का निवेश जारी रखें, लेकिन पोर्टफोलियो को अचानक आने वाली गिरावट से बचाने के लिए पुट ऑप्शंस के बजाय बॉन्ड-मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल करें। यह फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों के फैसलों से होने वाले झटकों को झेलने में मदद करेगा।
भारतीय निवेशकों पर असर
भारत की आईटी सर्विसेज कंपनियां सीधे तौर पर अमेरिका और यूरोप के टेक स्पेंडिंग पर निर्भर हैं। अगर ग्लोबल लेवल पर AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड बनी रहती है, तो भारतीय आईटी सेक्टर के रेवेन्यू के लिए यह एक अच्छा संकेत है।
हालांकि, बढ़ती ब्याज दरें कैपिटल कॉस्ट को बढ़ाती हैं, जिसका सीधा असर वैल्यूएशन पर पड़ता है। निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि 'लेट-साइकिल' का मतलब मार्केट मैच्योरिटी है, इसलिए अब बिना सोचे-समझे निवेश करने के बजाय सिलेक्टिव स्टॉक पिकिंग (Selective Stock Picking) ही मुनाफे की कुंजी होगी।
