BofA ने Nifty की कमाई का अनुमान बढ़ाया, मिड-कैप बैंकों में दिखी वैल्यू

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
BofA ने Nifty की कमाई का अनुमान बढ़ाया, मिड-कैप बैंकों में दिखी वैल्यू

बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ग्लोबल रिसर्च ने भारतीय इक्विटी के लिए अपनी कमाई की उम्मीदों को बढ़ाया है। ब्रोकरेज ने Nifty के लिए FY27 के अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर **10%** कर दिया है, जो पहले **8.5%** था।

FY28 के लिए भी मजबूत अनुमान

BofA का अनुमान है कि अगले फाइनेंशियल ईयर, FY28 में भी 15% की ग्रोथ रेट बनी रहेगी। यह पॉजिटिव सेंटिमेंट हाल की जून तिमाही के मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों के बाद आया है। इसके अलावा, देश की मजबूत डोमेस्टिक इकोनॉमी, जैसे कि लगातार क्रेडिट ग्रोथ और GST कलेक्शन, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद एक स्थिर आधार प्रदान कर रहे हैं।

मिड-कैप लेंडर्स पर दांव

अपनी पोर्टफोलियो स्ट्रेटेजी में एक बड़े बदलाव के तहत, BofA अब बड़े प्राइवेट और सरकारी बैंकों के बजाय मिड-साइज़्ड प्राइवेट बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) को तरजीह दे रहा है। ब्रोकरेज का मानना है कि मिड-साइज़्ड लेंडर्स मजबूत लोन ग्रोथ और स्टेबल नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) बनाए रखने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।

दूसरी ओर, बड़े वित्तीय संस्थानों के लिए कुछ चुनौतियाँ भी बताई गई हैं। सरकारी बैंकों को Expected Credit Loss (ECL) फ्रेमवर्क अपनाने से लोन डिफॉल्ट के लिए ज़्यादा प्रोविजनिंग करनी पड़ सकती है। वहीं, कुछ बड़े प्राइवेट बैंकों में ग्रोथ को लेकर तत्काल कोई बड़ा उत्प्रेरक (catalyst) नहीं दिख रहा है, साथ ही मैनेजमेंट में बदलाव से जुड़े जोखिम भी हैं।

सेक्टर अपग्रेड्स

BofA ने ऑटो, सीमेंट और रेगुलेटेड पावर यूटिलिटीज जैसे प्रमुख सेक्टर्स को 'ओवरवेट' (Overweight) कैटेगरी में अपग्रेड किया है, जिसका मतलब है कि ब्रोकरेज को इन सेक्टर्स से बाजार से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। ऑटो सेक्टर में मजबूत डिमांड, इंडस्ट्री वॉल्यूम में 15-20% की ईयर-टू-डेट ग्रोथ, सुधरते प्रॉफिट मार्जिन और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) को बढ़ती स्वीकार्यता का समर्थन मिल रहा है।

सीमेंट कंपनियों को भी बेहतर प्राइस रियलाइजेशन और जून तिमाही में 7.5-8% की वॉल्यूम ग्रोथ के कारण सकारात्मक देखा जा रहा है, जबकि लागत का दबाव नियंत्रण में बना हुआ है। रेगुलेटेड पावर यूटिलिटीज आकर्षक वैल्यूएशन और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में तेजी की उम्मीदों के चलते फोकस में हैं।

इसके विपरीत, ब्रोकरेज ने हेल्थकेयर, टेलीकॉम, इंडस्ट्रियल्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर्स पर 'अंडरवेट' (Underweight) का रुख बनाए रखा है। टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर को 'न्यूट्रल' (Neutral) कैटेगरी में रखा गया है, जो कि पिछले 'अंडरवेट' रेटिंग से एक बदलाव है। यह बदलाव IT स्टॉक्स में इस साल अब तक हुई बड़ी गिरावट के बाद आया है।

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

BofA ने दिसंबर 2026 तक Nifty इंडेक्स के लिए 26,200 का बेस केस टारगेट सेट किया है। हालाँकि, निवेशकों को कुछ प्रमुख कारकों पर नजर रखनी चाहिए जो इन अनुमानों को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें सरकारी बैंकों के लिए क्रेडिट लॉस नॉर्म्स का वास्तविक कार्यान्वयन, ऑटो और सीमेंट सेक्टर में प्रॉफिट मार्जिन की स्थिरता, और वैश्विक मैक्रो इकोनॉमिक स्थितियां शामिल हैं। कंज्यूमर खर्च और क्रेडिट डिमांड जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स की मजबूती भी इन ग्रोथ अनुमानों के साकार होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.