Choice Institutional Equities ने Birla Corporation पर अपना भरोसा बरकरार रखा है और ₹1,125 का टारगेट दिया है। दूसरी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट **59%** गिर गया, जिसके पीछे मुख्य कारण बढ़ते फ्यूल खर्चे और कमजोर सीमेंट कीमतें हैं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कंपनी अपने कॉस्ट प्रेशर को कैसे कंट्रोल करती है।
चुनौती भरा रहा Q2
Birla Corporation के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही काफी चुनौतीपूर्ण रही है। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 59% घटकर महज ₹37 करोड़ रह गया। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 9% बढ़कर ₹2,415 करोड़ तक पहुंचा, लेकिन सीमेंट की कमजोर कीमतों और क्लिंकर व फ्यूल की बढ़ती लागत ने मुनाफे पर गहरा असर डाला है।
जानकारों का मानना है कि तीसरी तिमाही में भी फ्यूल कॉस्ट प्रति टन ₹100 तक बढ़ सकती है, जो कंपनी के मार्जिन के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।
रिकवरी का प्लान
इन दबावों के बावजूद, ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी का मीडियम-टर्म आउटलुक अभी भी ठीक है। कंपनी अब अपनी निर्भरता बाहर से खरीदे गए महंगे फ्यूल पर कम करके खुद की Bikram जैसी कोयला खदानों और रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर दे रही है। साथ ही, कंपनी प्रीमियम सीमेंट उत्पादों पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि प्रति टन मुनाफे को बढ़ाया जा सके।
हाल ही में कंपनी के बोर्ड ने ₹250 करोड़ तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने की मंजूरी दी है, ताकि अपनी पूंजी की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
निवेशकों के लिए अहम रिस्क
कंपनी के लिए आने वाला समय मध्य भारत की मांग पर निर्भर करेगा। हालांकि, सीमेंट की कीमतों में ₹5 से ₹7 प्रति बैग की मामूली बढ़त देखी गई है, लेकिन इसकी स्थिरता पर संशय बरकरार है। निवेशकों को कंपनी के फ्यूल इन्फ्लेशन कंट्रोल और कोल माइनिंग प्रोजेक्ट्स की स्पीड पर नजर रखनी चाहिए।
