टेलीकॉम दिग्गज Bharti Airtel के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने कंपनी के मजबूत जून तिमाही के नतीजों के बाद इसके शेयर पर भरोसा जताया है और नया टारगेट प्राइस **₹2,275** तय किया है। यह टारगेट कंपनी के बढ़ते मुनाफे और प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) में हुई वृद्धि को दर्शाता है।
ब्रोकरेज का नया भरोसा: ₹2,275 का टारगेट
Brodarej firm Prabhudas Lilladher ने Bharti Airtel के शेयर पर अपनी राय को अपडेट करते हुए, टारगेट प्राइस को ₹2,275 पर सेट किया है। यह फैसला टेलीकॉम सेक्टर की इस बड़ी कंपनी के 30 जून, 2026 को समाप्त हुई तिमाही के शानदार फाइनेंशियल रिजल्ट्स के बाद आया है, जिसमें रेवेन्यू और प्रॉफिट दोनों में जोरदार ग्रोथ देखी गई।
जून तिमाही के नतीजे: रेवेन्यू और प्रॉफिट में उछाल
फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में, Bharti Airtel का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹58,539 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 18.4% ज्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट में 37.3% का शानदार इजाफा हुआ और यह ₹8,167 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी के लिए एक अहम मीट्रिक, एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU), जो बताता है कि कंपनी हर ग्राहक से कितना कमा रही है, वह भारत मोबाइल डिवीजन के लिए ₹264 दर्ज किया गया।
बैलेंस शीट और विस्तार की रणनीति
कंपनी ने अपने कर्ज को मैनेज करने में भी प्रगति दिखाई है। कंसॉलिडेटेड नेट डेट-टू-ऑपरेटिंग प्रॉफिट रेशियो सुधरकर 1.17 हो गया है, जो पिछले साल 1.70 था। इसका मतलब है कि कंपनी अपनी कमाई बढ़ने के साथ-साथ कर्ज का बोझ प्रभावी ढंग से कम कर रही है।
इसके बावजूद, कंपनी अपने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश जारी रखे हुए है। 5G सेवाओं का विस्तार और डेटा सेंटर बिजनेस को बढ़ाना, इन सबमें बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरत है। यह लगातार निवेश सर्विस क्वालिटी और अपनी मार्केट पोजिशन बनाए रखने के लिए जरूरी है, लेकिन यह कंपनी के कैश फ्लो पर भी दबाव बनाए रखता है। हाल ही में, कंपनी ने कर्मचारियों को 900,000 से ज्यादा स्टॉक ऑप्शन देने की घोषणा की है, जो उसके ऑर्गनाइजेशन मैनेजमेंट का हिस्सा है।
प्रतिस्पर्धा और बाजार के जोखिम
निवेशकों को सेक्टर की व्यापक तस्वीर पर भी गौर करना चाहिए। भारतीय टेलीकॉम और डेटा सेंटर सेक्टर में Reliance Industries और Adani Group जैसे बड़े खिलाड़ी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, जिससे यह सेक्टर काफी प्रतिस्पर्धी बन गया है। यह प्रतिस्पर्धा सभी कंपनियों की प्राइसिंग पावर और सब्सक्राइबर ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है।
इसके अलावा, टेलीकॉम सेक्टर में संभावित रेगुलेटरी बदलावों का भी सामना करना पड़ सकता है, जो ऑपरेटिंग माहौल को बदल सकते हैं। कंपनी के अफ्रीका ऑपरेशंस में लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल दिख रहा है, लेकिन करेंसी में उतार-चढ़ाव या एकमुश्त कमर्शियल मुद्दों जैसे जोखिम बने हुए हैं। भविष्य के लिए अर्निंग्स एस्टिमेट्स वर्किंग कैपिटल साइकिल्स और व्यापक मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर्स से भी प्रभावित हो सकते हैं।
आगे चलकर, बाजार प्रतिभागी संभवतः कंपनी की ARPU ग्रोथ को बनाए रखने और विस्तार परियोजनाओं के दौरान कर्ज को मैनेज करने की क्षमता पर नजर रखेंगे। ग्राहकों को हाई-वैल्यू प्लान्स की ओर ले जाने पर कंपनी का फोकस भी आने वाली तिमाहियों में एक महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगा।
