Nifty 50: दिग्गजों का बड़ा झटका! Bernstein ने घटाया दिसंबर 2026 का टारगेट, अब 25,000 का लेवल

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AuthorMehul Desai|Published at:
Nifty 50: दिग्गजों का बड़ा झटका! Bernstein ने घटाया दिसंबर 2026 का टारगेट, अब 25,000 का लेवल

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने Nifty 50 के लिए दिसंबर 2026 का टारगेट घटाकर **25,000** कर दिया है। सुस्त अर्निंग ग्रोथ और मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियों को इसकी मुख्य वजह बताया गया है।

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने अपने पिछले अनुमान 26,000 से घटाकर अब दिसंबर 2026 के लिए Nifty 50 का टारगेट 25,000 तय किया है। यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार के प्रति अधिक सतर्क रुख को दर्शाता है, क्योंकि बाजार को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ग्लोबल सप्लाई चेन में जारी अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

वैल्यूएशन और मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियां

ब्रोकरेज ने अपने नए टारगेट को फाइनेंशियल ईयर 2028 की अनुमानित कमाई के 18x वैल्यूएशन मल्टीपल पर आधारित किया है। यह 9% की ग्रोथ दर को ध्यान में रखकर तय किया गया है, जो संकेत देता है कि अब मार्केट की तेजी केवल वैल्यूएशन बढ़ने से नहीं, बल्कि ठोस कॉर्पोरेट प्रदर्शन से ही आएगी। फिलहाल इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर भारी दबाव है, क्योंकि मांग घटने के डर से कंपनियां इस लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रही हैं।

अर्निंग ग्रोथ और पॉलिसी का असर

लंबी अवधि के कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में राहत की उम्मीदें बाजार में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। Bernstein का मानना है कि टैक्स में कटौती से भले ही सेंटीमेंट सुधरे, लेकिन यह बाजार की लंबी अवधि की तेजी का आधार नहीं बन सकती। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का पैसा मुख्य रूप से भारत की स्ट्रक्चरल ग्रोथ और मुनाफे की रफ्तार पर निर्भर करता है। रिपोर्ट में यह भी साफ कहा गया है कि यदि केवल पॉलिसी की उम्मीद में बाजार में रैली आती है, तो यह इंस्टीट्यूशनल प्लेयर्स के लिए 'एग्जिट' का मौका हो सकता है।

कॉर्पोरेट अर्निंग की रफ्तार हाल के समय में सुस्त रही है। फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अनुमानों में पिछली तिमाही में केवल 0.2% की मामूली बढ़ोतरी हुई है। IT, हेल्थकेयर और ऑटो जैसे एक्सपोर्ट सेक्टर को रुपये की कमजोरी से थोड़ा फायदा मिल सकता है, लेकिन आयात की लागत बढ़ने से यह फायदा बेअसर हो सकता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मानसून से जुड़े जोखिमों के बीच, मार्केट अब ऐसे वैल्यूएशन लेवल पर पहुंच गया है जहां अर्निंग में निराशा होने पर बफर बहुत कम है।

निवेशकों को अब कंपनियों के मार्जिन की रक्षा और कच्चा माल सस्ता करने की क्षमता पर नजर रखनी चाहिए। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि क्या मैनेजमेंट की कमेंट्री मांग में मजबूती का संकेत देती है या मार्जिन का दबाव और गहरा होता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.