ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने दिसंबर 2026 के लिए Nifty 50 का टारगेट घटाकर **25,000** कर दिया है। महंगी वैल्यूएशन और कमजोर अर्निंग्स ग्रोथ को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है।
ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने अपने पिछले अनुमान 26,000 को घटाकर अब Nifty 50 के लिए दिसंबर 2026 का टारगेट 25,000 कर दिया है। बाजार में इंडियन स्टॉक्स की प्रीमियम वैल्यूएशन को लेकर एनालिस्ट्स काफी सतर्क नजर आ रहे हैं। भले ही इंडेक्स का 12 महीने का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स रेश्यो 16.6 गुना है, जो कि 6 साल का निचला स्तर है, फिर भी फर्म का मानना है कि एशियाई बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयर अब भी महंगे बने हुए हैं।
घरेलू निवेश ने थामी है गिरावट
बाजार में अब तक बड़ी गिरावट न आने की सबसे बड़ी वजह घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी है। सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लांस (SIP) और म्यूचुअल फंड्स का पैसा एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) की बिकवाली को बैलेंस कर रहा है। हालांकि, ब्रोकरेज का मानना है कि इस सपोर्ट ने बाजार को उस वैल्यूएशन तक नहीं पहुंचने दिया है, जिसे ग्लोबल इन्वेस्टर्स 'अट्रैक्टिव' मानते हैं।
अर्निंग्स और मैक्रो चुनौतियां
कॉर्पोरेट अर्निंग्स में तेजी की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अनुमानों में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिला है, बल्कि कई सेक्टर्स में लगातार कटौती हुई है। जब अर्निंग्स ग्रोथ स्टॉक की कीमतों के साथ कदमताल नहीं कर पाती, तो वैल्यूएशन पर दबाव बना रहता है।
इसके अलावा, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें, जियो-पॉलिटिकल तनाव और अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड अनिश्चितताएं ग्लोबल सेंटीमेंट को बिगाड़ रही हैं। साथ ही, बारिश का पैटर्न और जलाशयों का जलस्तर भी रूरल डिमांड पर असर डाल रहा है, जो इकोनॉमिक रिकवरी के लिए बहुत जरूरी है।
निवेशकों के लिए आउटलुक
एनालिस्ट्स का कहना है कि निकट भविष्य में बड़ी रैली की संभावना सीमित है। अगर बाजार वर्तमान स्तर से 4% से 5% और ऊपर जाता है, तो फॉरवर्ड अर्निंग्स मल्टीपल्स 18 गुना के औसत के करीब पहुंच जाएंगे, जिससे बाजार और भी महंगा दिखने लगेगा। निवेशकों के लिए अब कॉर्पोरेट मुनाफे में तेजी और मैक्रो-इकोनॉमिक स्टेबिलिटी पर नजर रखना सबसे जरूरी होगा।
