Bernstein के एनालिस्ट्स का मानना है कि AI में निवेश किया गया पैसा लिक्विड नहीं है, बल्कि यह लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स में फंसा है। ब्रोकरेज ने कमजोर अर्निंग्स और वैल्यूएशन चिंताओं के कारण Nifty 50 का टारगेट घटाकर **25,000** कर दिया है।
क्या AI का पैसा भारत आएगा?
निवेशकों के बीच एक थ्योरी चर्चा में थी कि अगर AI स्टॉक्स में गिरावट आती है, तो ग्लोबल लिक्विडिटी भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स की ओर मुड़ेगी। लेकिन ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, AI बूम में लगा पैसा लिक्विड स्टॉक्स में नहीं, बल्कि डेटा सेंटर्स और भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रोजेक्ट्स में फंसा हुआ है। यह पूंजी इतनी आसानी से निकालकर भारत में निवेश नहीं की जा सकती।
Nifty 50 के लिए नई चुनौती
भारतीय बाजार अपनी आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। Nifty 50 का 12-महीने का फॉरवर्ड P/E रेशियो 16.6x है, जो छह साल के निचले स्तर पर है। इसके बावजूद, Bernstein ने दिसंबर 2026 के लिए Nifty का टारगेट 28,100 से घटाकर 25,000 कर दिया है। इसका मुख्य कारण 2025-2027 के बीच कमजोर अर्निंग्स का अनुमान है।
FPIs की भारी निकासी और मैक्रो रिस्क
विदेशी निवेशक (FPIs) लगातार पैसा निकाल रहे हैं। केवल 2026 के शुरुआती नौ महीनों में ही FPIs ने बाजार से करीब ₹3.08 ट्रिलियन निकाल लिए हैं। इसके अलावा, भारत की क्रूड ऑयल आयात पर निर्भरता और रूस से मिलने वाले डिस्काउंट का कम होना देश के बैलेंस शीट पर दबाव बना रहा है, जो कॉर्पोरेट मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। अब निवेशकों की नजर सिर्फ कंपनी के अर्निंग्स पर होनी चाहिए, क्योंकि बाजार का भविष्य ग्लोबल ट्रेंड्स के बजाय घरेलू नतीजों पर निर्भर करेगा।
