नई रणनीति: हाई-मार्जिन प्रोजेक्ट्स पर Bajel Projects का फोकस
कंपनी अपनी कमाई की क्वालिटी और रेवेन्यू बढ़ाने के लिए अब कॉम्प्लेक्स और हाई-मार्जिन वाले ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है, खासकर 400 kV और 765 kV सेगमेंट में। यह कदम भारतीय पावर T&D सेक्टर में चल रहे बड़े बदलावों को भी दर्शाता है, जहाँ हाई-वोल्टेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया जा रहा है। कंपनी का रंजनगांव (Ranjangaon) मैन्युफैक्चरिंग प्लांट इसे इन-हाउस क्षमताएं प्रदान करता है, जिससे इसे हाई-वोल्टेज प्रोजेक्ट्स के लिए बेहतर कीमत मिल सके।
वैल्यूएशन पर सवाल और सेक्टर की बूम
Bajel Projects का मौजूदा वैल्यूएशन (Valuation) सेक्टर की दूसरी कंपनियों की तुलना में काफी ज्यादा है। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 126x से 150x के बीच है, जबकि सेक्टर का औसत लगभग 25x है। उदाहरण के लिए, Gujarat State Petronet 15.8x P/E पर ट्रेड करता है, और यूटिलिटीज का औसत 16.9x है। यह हाई P/E दर्शाता है कि निवेशक कंपनी से भविष्य में भारी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं।
भारतीय T&D EPC मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है। 2025 में जहां यह मार्केट $14.68 बिलियन का था, वहीं 2035 तक इसके $35.20 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह ग्रोथ रिन्यूएबल एनर्जी (2030 तक 500 GW, 2032 तक 600 GW) के इंटीग्रेशन, ग्रिड के विस्तार और बढ़ती बिजली मांग जैसे कारकों से प्रेरित है।
मजबूत ऑर्डर बुक, लेकिन चुनौतियां भी
कंपनी के पास ₹2,912 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक है, जो नियर-टू-मीडियम टर्म में रेवेन्यू विजिबिलिटी सुनिश्चित करती है। हाल के बड़े ऑर्डर्स में मार्च 2026 में MSETCL से ₹700 करोड़ का ऑर्डर और जून 2025 में Power Grid Corporation of India से ₹400 करोड़ का EPC कॉन्ट्रैक्ट शामिल है।
जोखिम और चिंताएं
कंपनी का बहुत हाई P/E रेश्यो एक बड़ा जोखिम है। यह बताता है कि बाजार ने पहले ही मजबूत भविष्य के प्रदर्शन को वैल्यू में शामिल कर लिया है, जिससे गलतियों या धीमी ग्रोथ के लिए बहुत कम गुंजाइश बची है।
T&D सेक्टर में प्रोजेक्ट्स में देरी और एग्जीक्यूशन (Execution) की समस्याएं आम हैं। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में कॉम्प्लेक्सिटी और लंबे टाइमलाइन प्रॉफिट और कैश फ्लो को प्रभावित कर सकती हैं।
Power Grid Corporation of India (PGCIL) और स्टेट ट्रांसकोज जैसे बड़े क्लाइंट्स पर अत्यधिक निर्भरता कंसंट्रेशन रिस्क (Concentration Risk) पैदा करती है। हाल ही में KEC International के PGCIL द्वारा टेंडर बैन का मामला ऐसे जोखिमों को दिखाता है।
हाल ही में, दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही में कंपनी ने ₹0.42 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया, जो तीन लगातार लाभदायक तिमाहियों के बाद आया। इसके अलावा, पहले के एक पीरियड में 60% प्रॉफिट बिफोर टैक्स नॉन-ऑपरेटिंग इनकम से आया था और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) सिर्फ 3.82% था, जिससे कोर प्रोजेक्ट वर्क से कमाई की सस्टेनेबिलिटी पर सवाल उठते हैं।
Bajel Projects हाई-वोल्टेज क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने के बावजूद, Adani Energy Solutions और Kalpataru Projects जैसी बड़ी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है।
आगे का रास्ता
कंपनी FY27E और FY28E के लिए प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में जबरदस्त ग्रोथ का अनुमान लगा रही है। FY25-28E के लिए अनुमानित 67% EBITDA CAGR, इसकी बड़ी ऑर्डर बुक और रंजनगांव फैसिलिटी से होने वाली एफिशिएंसी गेन्स द्वारा समर्थित है। विश्लेषकों की राय स्पष्ट नहीं है, जो यह बताता है कि निवेशकों के विचार कंपनी की रणनीति और उसके वर्तमान वैल्यूएशन तथा ऑपरेशनल फैक्टर्स के बीच बंटे हुए हैं।
