BSE के इक्विटी डेरिवेटिव वॉल्यूम में हालिया सेटलमेंट फ्रेमवर्क और सख्त लेवरेज नियमों के कारण कमी आई है। इस बदलाव से फाइनेंशियल ईयर के ग्रोथ अनुमानों को कम किया गया है, जबकि निवेशक अब कमोडिटी सेगमेंट की ओर रुख कर रहे हैं।
रेगुलेशन का असर
BSE के इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। इसका मुख्य कारण 3 अगस्त, 2026 से लागू हुआ नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन और RBI द्वारा लगाए गए सख्त लेवरेज नियम हैं। इन बदलावों और बाजार में कम वॉलिटिलिटी के कारण निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ा है।
आंकड़ों में गिरावट
रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 अगस्त से 28 अगस्त, 2026 के बीच BSE पर ऑप्शंस प्रीमियम का एवरेज डेली टर्नओवर 22% गिर गया है, जबकि कुल ट्रेडेड कॉन्ट्रैक्ट्स में 30% की भारी कमी दर्ज की गई है। FY27 के लिए इक्विटी-ऑप्शंस वॉल्यूम ग्रोथ के अनुमान को घटाकर अब 5% कर दिया गया है, जो कि पहली तिमाही में 31% की शानदार उछाल के बाद एक बड़ी गिरावट है।
निवेशकों का बदलता रुझान
अब निवेशक अपना पैसा Multi Commodity Exchange of India (MCX) की ओर ले जा रहे हैं। वहां कमोडिटी डेरिवेटिव्स में काफी तेजी देखी जा रही है। चूँकि इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग अब महंगी और सीमित हो गई है, इसलिए रिटेल पार्टिसिपेंट्स अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई कर रहे हैं।
ब्रोकरेज और मार्केट सेंटीमेंट
इसका सीधा असर BSE के शेयर पर दिखा है, जो पिछले एक महीने में लगभग 11% तक टूट चुका है। केवल 11 सितंबर, 2026 को ही इसमें 3-4% की गिरावट देखी गई। Motilal Oswal जैसे ब्रोकरेज हाउस ने BSE की कमाई के अनुमानों को 9% तक कम कर दिया है। अब सभी की निगाहें SEBI के अगले कदम पर हैं कि क्या वह सेटलमेंट प्राइस के नियमों में कोई और राहत देता है या नहीं।
