Nifty की राह में बड़े रोड़े, ब्रोकरेज की बदली राय
ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस BNP Paribas ने भारतीय शेयर बाजार (Indian Equity Market) के लिए अपना 2026 का Nifty टारगेट काफी कम कर दिया है। उन्होंने टारगेट को 11% घटाकर 25,500 पर ला दिया है। इस फैसले से पता चलता है कि वे भारतीय बाजार को लेकर थोड़े सतर्क हैं।
इस बदलाव की मुख्य वजहें हैं:
- भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions): मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल आया है। BNP Paribas का मानना है कि हाई ऑयल प्राइस का असर लंबे समय तक रह सकता है।
- बाजार का वैल्यूएशन (Market Valuation): भले ही बाजार का वैल्यूएशन अभी लंबे समय के औसत के करीब आ गया है, लेकिन ब्रोकरेज का अनुमान है कि यहां से 7% से ज्यादा की तेजी मुश्किल है।
तेल की मार और सरकारी खर्चे का बोझ
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव $100 प्रति बैरल तक पहुंचना, जो 2025 के औसत $69 से काफी ऊपर है, भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। BNP Paribas के हिसाब से, तेल की कीमतों में हर $10 का इजाफा करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) को 0.35% तक बढ़ा सकता है।
इसके अलावा, सरकार पर भी फिस्कल प्रेशर बढ़ सकता है। महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार को फ्यूल टैक्स कम करना पड़ सकता है, जिससे रेवेन्यू का नुकसान होगा। 2026-27 के लिए 4.3% का फिस्कल डेफिसिट टारगेट (Fiscal Deficit Target) खतरे में है, और कुछ एनालिस्ट इसे 5% तक जाते देख रहे हैं।
वहीं, 10-साल की भारतीय बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) फिलहाल 6.94% के करीब है, जो स्टॉक के वैल्यूएशन को ज्यादा बढ़ने नहीं देगा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भी बिकवाली कर रहे हैं और 2026 में अब तक करीब ₹1.8 लाख करोड़ निकाल चुके हैं।
AI का बढ़ता दबदबा और सेक्टर की अपनी समस्याएं
कमोडिटी की कीमतों के अलावा, कुछ गहरी स्ट्रक्चरल दिक्कतें भी चिंता बढ़ा रही हैं। भारत के IT सेक्टर, जो ग्रोथ का एक अहम इंजन है, उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ग्लोबल डिमांड में सुस्ती से परेशानी हो सकती है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 तक 60% से ज्यादा नौकरियों पर ऑटोमेशन का खतरा मंडरा रहा है। IT इंडेक्स पहले ही पिछले एक साल में 20% से ज्यादा गिर चुका है।
कंज्यूमर स्टेपल्स (Consumer Staples) जैसे डिफेंसिव सेक्टर में भी इनपुट कॉस्ट बढ़ने से दिक्कतें दिख रही हैं। ऑटो सेक्टर में एल्युमिनियम और कॉपर जैसी चीजों की लागत बढ़ी है, हालांकि मार्च में PV सेल्स 16% बढ़ीं। सीमेंट सेक्टर को सरकारी खर्च से सहारा मिल रहा है, लेकिन मार्जिन पर दबाव है। बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ स्थिर है, लेकिन मार्जिन पर असर पड़ रहा है।
पिछला इतिहास बताता है, तेल का झटका लंबा चल सकता है
BNP Paribas के एनालिस्ट कुणाल वोरा ने कहा है कि तेल की ऊंची कीमतों का असर इस बात पर निर्भर करता है कि वे कब तक बनी रहती हैं। 2011-2013 के दौर में जब तेल महंगा था, तो महंगाई और बॉन्ड यील्ड बढ़ी रही, जिसका अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा। इससे यह लग रहा है कि मौजूदा कीमत वृद्धि से उम्मीद से ज्यादा समय तक स्टैगफ्लेशनरी प्रेशर (Stagflationary Pressure) बन सकता है।
बाकी 2026 के लिए मिली-जुली उम्मीदें
BNP Paribas का नया अनुमान है कि 2026 के बाकी समय के लिए बाजार में मामूली ही तेजी देखने को मिलेगी। भू-राजनीतिक अस्थिरता, एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और AI का नौकरियों पर असर, ये सब मिलकर एक अनिश्चित माहौल बना रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन में सरकारी खर्च कुछ सहारा दे सकता है, लेकिन बाकी आर्थिक दबावों को संभालना होगा। विदेशी निवेशक अभी भी पैसा निकाल रहे हैं, इसलिए भारतीय शेयरों में शॉर्ट से मीडियम टर्म में सावधानी बरतने की सलाह है।