बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच Axis Direct के CEO प्रणव हरिदासन ने निवेशकों को सतर्क रहने और चरणों में निवेश (Phased Investment) करने की सलाह दी है। Nifty का वैल्यूएशन अब ऐतिहासिक औसत से नीचे है, जिससे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक अच्छा मौका हो सकता है।
बाजार का वर्तमान समीकरण
Axis Securities (Axis Direct) के CEO प्रणव हरिदासन का मानना है कि मौजूदा बाजार 'कंसोलिडेशन' के दौर से गुजर रहा है। Nifty का 1-वर्षीय फॉरवर्ड अर्निंग्स मल्टीपल 17x पर ट्रेड कर रहा है, जो कि 18.4x के ऐतिहासिक औसत से नीचे है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्केट की अगली बड़ी चाल किसी तात्कालिक ट्रिगर के बजाय कॉरपोरेट अर्निंग्स ग्रोथ पर निर्भर करेगी।
क्यों सुरक्षित है भारतीय बाजार?
साल 2026 में भारतीय शेयर बाजार का आधार मजबूत हो रहा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेश (DIIs) और SIPs के जरिए आ रहा रिकॉर्ड पैसा बाजार को एक बड़ा सपोर्ट दे रहा है। यही वजह है कि ग्लोबल मार्केट में जारी अस्थिरता का असर भारतीय बाजार पर कम पड़ रहा है।
रिटेल निवेशकों का बदलता ट्रेंड
बाजार में एक बड़ा बदलाव यह देखा जा रहा है कि F&O (Futures & Options) सेगमेंट में हो रहे भारी नुकसान के बाद अब रिटेल निवेशक सट्टेबाजी से दूर हो रहे हैं। निवेशक अब खुद ट्रेड करने के बजाय प्रोफेशनल एडवाइजरी और लक्ष्य-आधारित (Goal-based) पोर्टफोलियो की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
चुनौतियां अभी बाकी हैं
उछाल की संभावनाओं के बीच कुछ जोखिम भी हैं जिन पर निवेशकों की नजर रहनी चाहिए:
- प्राइवेट कैपेक्स: निजी क्षेत्र में पूंजीगत व्यय की रफ्तार अभी धीमी है।
- क्रूड ऑयल: कच्चे तेल की कीमतों का दबाव लगातार बना हुआ है।
- ग्लोबल यील्ड्स: वैश्विक बॉन्ड यील्ड्स में अस्थिरता का असर मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ सकता है।
आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने के लिए कॉरपोरेट अर्निंग्स और मार्जिन विस्तार पर नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि फिलहाल सट्टा लगाने के बजाय मजबूत फंडामेंटल्स वाली कंपनियों पर दांव लगाना ही समझदारी है।
