सरकारी कंपनियों (PSUs) में सरकार अपनी हिस्सेदारी **15%** तक कम कर सकती है। Axis Capital के इस बड़े प्रस्ताव का मकसद बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाना और सरकारी खजाने को मजबूती देना है।
बड़ा सरकारी प्लान: क्या है Axis Capital का सुझाव?
Axis Capital ने सरकार के सामने एक बड़ी रणनीति पेश की है, जिसके तहत अगले 3 साल में लिस्टेड सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी 15% तक घटाई जा सकती है। इस कदम से सरकारी खजाने में ₹6.6 लाख करोड़ की भारी-भरकम राशि आ सकती है, जो नॉन-टैक्स रेवेन्यू के तौर पर एक बड़ा सहारा बनेगी।
मार्केट पर क्या होगा असर?
ब्रोकरेज का मानना है कि भारतीय बाजार में मौजूदा स्ट्रक्चरल असंतुलन को ठीक करने के लिए यह जरूरी है। फिलहाल, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) की बिकवाली का भार घरेलू निवेशक उठा रहे हैं। सरकारी कंपनियों में पब्लिक शेयरहोल्डिंग या 'फ्री फ्लोट' बढ़ने से मार्केट में लिक्विडिटी आएगी, जिससे बड़े ग्लोबल फंड्स के लिए इन स्टॉक्स में पैसा लगाना आसान हो जाएगा।
वैल्युएशन और फिस्कल चुनौतियां
Axis Capital की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय इक्विटी वैल्युएशन अभी अपने ऐतिहासिक औसत से 12% ऊपर चल रहे हैं। ज्यादा क्वालिटी सप्लाई आने से ये प्रीमियम कम होंगे और मार्केट में संतुलन लौटेगा। साथ ही, FY27 और FY28 के बजट दबावों—जैसे कि 8th Pay Commission का बोझ—को संभालने के लिए यह विनिवेश (Divestment) एक 'फिस्कल कुशन' का काम करेगा।
निवेशकों के लिए जोखिम भी है
हालांकि यह प्लान आकर्षक लगता है, लेकिन सरकार का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड चुनौतीपूर्ण रहा है और कई बार विनिवेश के लक्ष्य अधूरे रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता डिविडेंड से होने वाली रेगुलर कमाई का नुकसान है, जो सरकारी खजाने को एकमुश्त पैसा मिलने के बाद कम हो सकती है। अब देखना होगा कि सरकार इसे एक स्ट्रक्चर्ड रोडमैप की तरह लागू करती है या सिर्फ मौके के हिसाब से वन-ऑफ सेल्स का सहारा लेती है।
