अगस्त में Nifty 50 में **1.25%** की गिरावट आई, लेकिन मिड-कैप शेयरों में जोरदार तेजी दिखी। इस दौरान MCX India, Ather Energy और Welspun Corp टॉप परफॉर्मर्स रहे। सितंबर की शुरुआत में इन शेयरों के साथ-साथ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक ब्याज दरों जैसे रिस्क पर नजर रखना जरूरी है।
अगस्त 2026 का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए लार्ज-कैप और मिड-कैप के बीच बड़े अंतर का गवाह बना। जहां बेंचमार्क Nifty 50 इंडेक्स उतार-चढ़ाव के बीच 1.25% गिरकर 24,080 पर बंद हुआ, वहीं मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स ने क्रमशः 2.08% और 3.06% की बढ़त दर्ज की। यह ट्रेंड बताता है कि निवेशकों का रुझान अब मिड-साइज कंपनियों की ओर शिफ्ट हो रहा है, जहां 110 से ज्यादा शेयरों ने महीने के दौरान 5% से अधिक का रिटर्न दिया है।
मोमेंटम वाले स्टॉक्स
शानदार प्रदर्शन करने वालों में MCX India, Ather Energy और Welspun Corp मुख्य रहे। YES Securities के एनालिस्ट्स के मुताबिक, इन कंपनियों में बाजार की सुस्ती के बावजूद जबरदस्त बाइंग देखी गई। उदाहरण के तौर पर, Welspun Corp ने अगस्त में 39% की शानदार तेजी दिखाई। वहीं, Ather Energy ने करेक्शन के बाद फिर से रफ्तार पकड़ी है, जबकि MCX India में टेक्निकल चार्ट्स पर तेजी के संकेत बन रहे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऊंचे स्तरों पर निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि कभी-कभी ओवर-बाइंग के बाद कंसोलिडेशन का दौर भी आता है।
सितंबर के लिए चुनौतियां
मिड-कैप की इस तेजी के बावजूद सितंबर के लिए बाजार का आउटलुक सतर्क है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $90 प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जो कंपनियों के लिए कॉस्ट प्रेशर बढ़ा सकती हैं। साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव ने चिंता पैदा कर दी है।
इसके अलावा, निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) के सितंबर 2026 के फैसलों पर भी टिकी है। ब्याज दरों में बदलाव से विदेशी निवेश (FII) के प्रवाह पर असर पड़ सकता है, जिससे भारतीय बाजारों में अस्थिरता आ सकती है। देखना यह होगा कि क्या ये मिड-कैप स्टॉक्स इस कठिन मैक्रो माहौल में अपना मोमेंटम बनाए रख पाते हैं या Nifty के साथ वापस तालमेल बिठाते हैं।
