Astra Microwave Share Price: ब्रोकरेज का भरोसा बढ़ा, टारगेट ₹1,900 पार!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Astra Microwave Share Price: ब्रोकरेज का भरोसा बढ़ा, टारगेट ₹1,900 पार!

Motilal Oswal ने Astra Microwave के लिए अपना प्राइस टारगेट बढ़ाकर ₹1,900 कर दिया है। यह बढ़ोतरी कंपनी की रिकॉर्ड ₹43 बिलियन की ऑर्डर बुक के दम पर आई है, भले ही Q1 FY27 के नतीजे कमजोर रहे हों।

Motilal Oswal की नई रेटिंग और टारगेट

Motilal Oswal ने Astra Microwave Products पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए, स्टॉक का टारगेट प्राइस ₹1,715 से बढ़ाकर ₹1,900 कर दिया है। यह कदम कंपनी के पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों के बाद आया है, जो उम्मीद से कुछ कमजोर थे। ब्रोकरेज का पॉजिटिव नजरिया कंपनी की लगातार बढ़ती ऑर्डर बुक पर टिका है, जो अब रिकॉर्ड स्तर पर ₹43 बिलियन यानी 4,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

ऑर्डर बुक और प्रदर्शन में अंतर

कंपनी के लिए सबसे बड़ी मजबूती ₹22 बिलियन का हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से मिला 'उत्तम रडार' प्रोजेक्ट का ऑर्डर है। इस एक बड़े सौदे ने कंपनी की कुल ऑर्डर बुक को लगभग दोगुना कर दिया है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म ने यह भी माना है कि ऑर्डर बुक में इस भारी उछाल का असर कंपनी के तिमाही नतीजों पर फौरन नहीं दिखा है। Q1 FY27 में Astra Microwave का स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 11% घटकर ₹176 करोड़ रहा, वहीं नेट प्रॉफिट (PAT) 24% गिरकर ₹10 करोड़ पर आ गया। ब्रोकरेज के अनुसार, इन कमजोर नतीजों का मुख्य कारण प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में हो रही देरी है।

स्ट्रैक्चरल बदलाव और लीडरशिप ट्रांजीशन

वित्तीय आंकड़ों के अलावा, कंपनी में कुछ बड़े स्ट्रैक्चरल बदलाव भी हो रहे हैं। बोर्ड ने अपने स्पेस, मेट्रोलॉजी और हाइड्रोलॉजी बिजनेस को एक अलग कंपनी में डीमर्ज (Demerger) करने की मंजूरी दे दी है, जिसके लिए रेगुलेटरी अप्रूवल का इंतजार है। साथ ही, कंपनी एक बड़े लीडरशिप ट्रांजीशन के लिए भी तैयार है, जिसमें M.V. Reddy 1 अक्टूबर 2026 से मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभालेंगे। ये कदम कंपनी के ऑर्गनाइजेशनल फोकस में बदलाव का संकेत देते हैं, जिस पर निवेशकों की नजर रहेगी।

ध्यान रखने योग्य जोखिम

भले ही कंपनी के पास भविष्य के रेवेन्यू के लिए एक मजबूत ऑर्डर बुक है, लेकिन निवेशकों को कुछ जोखिमों से भी आगाह रहना चाहिए। सबसे बड़ी चिंता प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में हो रही देरी है, जिसका असर हालिया तिमाही के मार्जिन और प्रॉफिट पर साफ दिखा है। अगर सप्लाई चेन की दिक्कतें, टेक्निकल इंस्पेक्शन या ग्राहक की मंजूरी में देरी जारी रहती है, तो रेवेन्यू का आना अनिश्चित बना रह सकता है। इसके अलावा, शेयर में इस साल अब तक काफी तेजी आ चुकी है, इसलिए निवेशक यह जरूर देखें कि मौजूदा वैल्यूएशन इन बड़े ऑर्डर्स के एक्चुअल रेवेन्यू में बदलने की समय-सीमा के हिसाब से कितना सही है। आने वाले डीमर्जर की सफलता और लीडरशिप ट्रांजीशन का सुचारू होना भी कंपनी की लॉन्ग-टर्म स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.