मार्केट एक्सपर्ट अश्विनी अग्रवाल ने इंश्योरेंस कंपनियों और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में निवेश की संभावना जताई है। मजबूत कैश फ्लो और उचित वैल्युएशन के चलते ये सेक्टर निवेशकों के लिए आकर्षक बने हुए हैं।
इंश्योरेंस और मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर में वैल्यू
Demeter Advisors के स्ट्रेटेजिस्ट अश्विनी अग्रवाल के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कूल-डाउन होने के बाद अब इंश्योरेंस स्टॉक्स निवेशकों के लिए आकर्षक हो गए हैं। हालांकि डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन को लेकर आए नए रेगुलेशंस का असर मुनाफे पर दिख सकता है, लेकिन बिजनेस फंडामेंटल्स अभी भी बहुत मजबूत हैं। खासतौर पर हेल्थ इंश्योरेंस सेगमेंट ग्रोथ के लिए एक बड़ा इंजन साबित हो रहा है।
वहीं, मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर में NSE का प्रदर्शन काफी दमदार है। अपनी लीडरशिप पोजीशन और कंसिस्टेंट कैश फ्लो के दम पर कंपनी वैल्युएशन प्रीमियम को सही ठहराती है। हालांकि, निवेशकों को रेगुलेटरी स्क्रूटनी पर नजर रखनी चाहिए, खासकर सट्टेबाजी से जुड़ी गतिविधियों और ट्रेडिंग डे के आखिरी मिनटों में होने वाले कामकाज को लेकर।
बैंकिंग सेक्टर में मजबूती, लेंडिंग रिस्क बरकरार
बैंकिंग सेक्टर क्रेडिट ग्रोथ के दम पर मजबूती दिखा रहा है। नए कमीशन नॉर्म्स का असर इन बैंकों के मुनाफे पर कुछ प्रतिशत ही रहने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर, नॉन-बैंकिंग फाइनेंस सेक्टर में एसेट साइकिल को लेकर उठापटक जारी है। Bandhan Bank जैसे संस्थानों का जिक्र अक्सर इस सेक्टर के रिस्क को दर्शाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, कई फिनटेक कंपनियों के वैल्युएशन उनकी असली फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के मुकाबले काफी ज्यादा (stretched) दिख रहे हैं।
अन्य सेक्टर में अवसर
कोर फाइनेंशियल सर्विसेज के अलावा माइक्रोफाइनेंस कंपनियां भी सस्टेनेबल ग्रोथ की राह पर हैं। साथ ही, डोमेस्टिक केमिकल और फार्मास्युटिकल सेक्टर की कुछ छोटी कंपनियां भी अंडरवैल्यूड दिख रही हैं। मार्केट जैसे-जैसे इनके लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को समझेगा, इन स्टॉक्स की री-रेटिंग की पूरी संभावना है। निवेशकों को फिलहाल रेगुलेटरी अपडेट्स और एसेट क्वालिटी ट्रेंड्स पर बारीक नजर रखने की सलाह दी गई है।
