ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने Apollo Hospitals Enterprise पर अपनी 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है। कंपनी ने Q2 FY27 में **23%** की दमदार रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है, जबकि निवेशक अब कंपनी के डिजिटल हेल्थ और फार्मेसी कारोबार के डीमर्जर पर नजरें टिकाए हुए हैं।
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में Apollo Hospitals ने शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹7,615 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 23% अधिक है। वहीं, ऑपरेटिंग प्रॉफिट यानी EBITDA में 29% का उछाल दर्ज किया गया और यह ₹1,191 करोड़ पर पहुंच गया है। कंपनी के अस्पताल नेटवर्क में स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार बढ़ती मांग इन नतीजों का मुख्य कारण है।
डीमर्जर से वैल्यू अनलॉकिंग की उम्मीद
ब्रोकरेज की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का स्ट्रक्चरल रिअलाइनमेंट यानी डीमर्जर निवेशकों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। Apollo Hospitals अपने 'ओमनीचैनल फार्मेसी' और 'डिजिटल हेल्थ' डिवीजनों को एक अलग लिस्टेड कंपनी बनाने की प्रक्रिया में है। इस कदम से हाई-ग्रोथ डिजिटल एसेट्स और कोर हॉस्पिटल बिजनेस अलग हो जाएंगे, जिससे शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉकिंग की बड़ी संभावना है। फिलहाल यह योजना रेगुलेटरी पाइपलाइन में है।
मार्जिन आउटलुक और चुनौतियां
डिजिटल और फार्मेसी प्लेटफॉर्म Apollo HealthCo ने अपनी Q4 FY27 मार्जिन गाइडेंस को संशोधित कर करीब 6% कर दिया है। इसके पीछे वन-टाइम ऑर्गनाइजेशनल खर्च और लॉन्ग-टर्म इंसेंटिव प्लान (LTIP) की लागत मुख्य कारण है।
हालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों के प्रति सावधान रहने की जरूरत है:
- एग्जीक्यूशन रिस्क: नई बेड कैपेसिटी का इंटीग्रेशन और डिजिटल फार्मेसी मॉडल को स्केल करना एक चुनौती हो सकता है।
- रेगुलेटरी अनिश्चितता: सरकार द्वारा दवाओं के दाम पर कैप लगाने का दायरा बढ़ने से मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
- प्रतिस्पर्धा: हॉस्पिटल और डिजिटल फार्मेसी सेक्टर में कॉम्पिटिशन लगातार बढ़ रहा है, जिससे सर्विस क्वालिटी और लागत का संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।
