Angel One: Zerodha को पछाड़कर बना देश का दूसरा सबसे बड़ा ब्रोकर, निवेशकों में जोश

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AuthorMehul Desai|Published at:
Angel One: Zerodha को पछाड़कर बना देश का दूसरा सबसे बड़ा ब्रोकर, निवेशकों में जोश

ब्रोकरेज इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Angel One ने Zerodha को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। अक्टूबर 2026 तक कंपनी के पास **69.98 लाख** एक्टिव NSE क्लाइंट्स हो गए हैं, जबकि रेगुलेटरी बदलावों के बीच बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।

ब्रोकिंग जगत में एक बड़े उलटफेर के तहत Angel One ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या के मामले में Zerodha को पछाड़ दिया है। अक्टूबर 2026 के अंत तक Angel One के पास 69.98 लाख एक्टिव निवेशक हो गए हैं, जबकि Zerodha के पास यह संख्या 67.6 लाख दर्ज की गई है। यह बदलाव एक ऐसे सेक्टर में हुआ है जो लंबे समय से कुछ चुनिंदा दिग्गजों के दबदबे में था।

रेगुलेटरी दबाव और बाजार में बदलाव

भारतीय ब्रोकिंग स्पेस इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है। SEBI ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग के लिए काफी कड़े नियम लागू किए हैं, जिसमें एक्सपायरी शेड्यूल में बदलाव और रिस्क मैनेजमेंट की सख्त शर्तें शामिल हैं। इन नियमों का असर उन ब्रोकरों के बिजनेस मॉडल पर पड़ा है जो मुख्य रूप से रिटेल ट्रेडर्स पर निर्भर थे। 2025 के दौरान Angel One और Zerodha, दोनों का ही यूजर बेस इन नए नॉर्म्स की वजह से दबाव में रहा था।

शानदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

रैंकिंग में इस उछाल के पीछे कंपनी का मजबूत प्रदर्शन है। Angel One ने हाल ही में अपने दूसरे क्वार्टर के नतीजों में 58% की जबरदस्त प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज की है। इस खबर के बाद 3 नवंबर, 2026 को कंपनी के शेयर में 7% से ज्यादा की तेजी देखी गई, जो निवेशकों का कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटेजी पर भरोसा दिखाता है।

प्रतिस्पर्धा और भविष्य की राह

हालांकि Angel One दूसरे स्थान पर आ गया है, लेकिन Groww अभी भी 1.37 करोड़ से ज्यादा क्लाइंट्स के साथ टॉप पर बरकरार है। अब इन शीर्ष तीन ब्रोकरों के बीच जंग और तेज हो गई है। अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए ये कंपनियां म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स और कॉर्पोरेट बॉन्ड्स जैसे विविध विकल्पों पर जोर दे रही हैं ताकि केवल ट्रेडिंग वॉल्यूम पर निर्भरता कम हो सके।

निवेशकों को अब सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि बढ़े हुए कंप्लायंस खर्च के कारण प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव रह सकता है। साथ ही, रेगुलेटरी बदलावों का ट्रेडिंग एक्टिविटी पर असर लंबे समय तक मॉनिटर करना जरूरी होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.