Angel One ने ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए अपनी वर्कफोर्स को **3,823** से घटाकर **2,934** कर दिया है। ब्रोकरेज अब डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर निर्भरता कम करने के लिए 'सुपर-ऐप' मॉडल की ओर रुख कर रही है।
बड़ा रणनीतिक बदलाव
फाइनेंशियल ईयर 2026 के दौरान Angel One ने अपनी स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव करते हुए परमानेंट कर्मचारियों की संख्या में लगभग 23% की कटौती की है। यह फैसला बदलते मार्केट माहौल और बढ़ते कॉम्पिटिशन के बीच कंपनी की कार्यकुशलता को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है।
रेगुलेटरी दबाव और सुपर-ऐप का दांव
SEBI की ओर से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में रिस्क मैनेजमेंट को लेकर आए सख्त नियमों के बाद ब्रोकरेज सेक्टर में अनिश्चितता का माहौल है। चूंकि Angel One की कमाई का बड़ा हिस्सा एक्टिव ट्रेडर्स से मिलने वाले ट्रांजेक्शन शुल्क पर आधारित रहा है, इसलिए अब कंपनी अपना बिजनेस मॉडल बदल रही है। अब कंपनी का पूरा ध्यान 'सुपर-ऐप' बनाने पर है, जहां ट्रेडर्स को ट्रेडिंग के अलावा इंश्योरेंस, क्रेडिट प्रोडक्ट्स और वेल्थ मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। गौरतलब है कि कंपनी के नॉन-ब्रोकिंग बिजनेस, जैसे क्लाइंट फंडिंग और वेल्थ मैनेजमेंट, पहले ही कुल रेवेन्यू में करीब 40% का योगदान दे रहे हैं।
शानदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
कॉस्ट कटिंग के बावजूद कंपनी का प्रॉफिट ग्राफ ऊपर की ओर है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में Angel One का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹2.31 बिलियन रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 102.1% की जबरदस्त उछाल है। 1 अक्टूबर, 2026 को कंपनी का शेयर ₹276.80 पर बंद हुआ था।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि कंपनी मुनाफे में है, लेकिन Zerodha और Groww जैसे बड़े खिलाड़ियों से उसे कड़ी टक्कर मिल रही है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क डेरिवेटिव्स सेगमेंट में कंपनी का कंसंट्रेशन है। यदि रेगुलेटरी सख्ती और बढ़ती है, तो इसका असर सीधे बॉटम लाइन पर पड़ सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि कंपनी अपने मौजूदा ट्रेडर्स को नए सुपर-ऐप फीचर्स के जरिए कितना जोड़ पाती है और नॉन-ट्रेडिंग बिजनेस से रेवेन्यू को कैसे सस्टेन करती है।
