ब्रोकरेज फर्म Anand Rathi ने HDFC Bank पर अपना 'Buy' रेटिंग बनाए रखा है और मौजूदा वैल्यूएशन के आधार पर ₹963 का टारगेट प्राइस तय किया है। रिपोर्ट में लोन ग्रोथ में सुस्ती और नेट इंटरेस्ट मार्जिन में गिरावट जैसी चुनौतियों का जिक्र किया गया है, खासकर ICICI Bank और Axis Bank जैसे प्राइवेट सेक्टर के साथियों की तुलना में।
Anand Rathi का HDFC Bank पर भरोसा कायम
ब्रोकरेज फर्म Anand Rathi ने HDFC Bank के प्रति अपना सकारात्मक नजरिया बनाए रखा है। फर्म ने बैंक के शेयर के लिए ₹963 का टारगेट प्राइस सेट किया है। यह वैल्यूएशन बैंक के मौजूदा मूल्यांकन पर आधारित है, जिसमें इसके कोर बिजनेस का मूल्य 2028 के अनुमानित प्राइस-टू-बुक रेशियो (Price-to-Book Ratio) का 2 गुना लगाया गया है, और सहायक कंपनियों के लिए प्रति शेयर ₹100 अतिरिक्त जोड़े गए हैं।
मर्जर के बाद ऑपरेशनल चुनौतियां
HDFC Bank ने अपने लोन बुक में सालाना 15.5% की ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन यह ग्रोथ ICICI Bank और Axis Bank जैसे बड़े प्रतिस्पर्धियों की तुलना में थोड़ी धीमी है। निवेशकों के लिए चिंता का एक प्रमुख कारण नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margin - NIM) में 13 बेसिस पॉइंट की तिमाही-दर-तिमाही गिरावट रही है। इस गिरावट से HDFC Bank और उसके साथियों के बीच प्रदर्शन का अंतर बढ़ गया है। ब्रोकरेज फर्म ने यह भी बताया कि बैंक अभी भी मर्जर के बाद की ऑपरेशनल बाधाओं से जूझ रहा है, खासकर CASA रेशियो (Current Account Savings Account Ratio) को स्थिर करने में, जो कि कम लागत वाले डिपॉजिट का अनुपात होता है।
रिटर्न और फंडिंग काoutlook
आंकड़े बताते हैं कि फंडिंग कॉस्ट के मामले में बैंक को ICICI Bank की तुलना में नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन वजहों से, ब्रोकरेज का अनुमान है कि मध्यम अवधि में बैंक का रिटर्न ऑन इक्विटी (Return on Equity - RoE) या लोन ग्रोथ 14% से लगातार ऊपर नहीं रहेगा। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि लोन ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए बैंक का उच्च-लागत वाली फंडिंग पर निर्भर रहना, उसकी प्रॉफिटेबिलिटी मार्जिन पर लगातार दबाव बना रहा है। हालांकि, एसेट क्वालिटी (Asset Quality) यानी लोन पोर्टफोलियो की सेहत काफी हद तक स्थिर बनी हुई है, लेकिन ये ऑपरेशनल मेट्रिक्स (Operational Metrics) अभी भी महत्वपूर्ण मॉनिटर करने वाले बिंदु हैं।
लीडरशिप और सेक्टर का संदर्भ
ऑपरेशनल मेट्रिक्स के अलावा, बाजार की नजरें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के वर्तमान सीईओ के कार्यकाल विस्तार की संभावना पर भी टिकी हैं। यह, बड़े प्राइवेट बैंकों से मिलने वाले प्रतिस्पर्धी दबाव के साथ मिलकर, स्टॉक के लिए अनिश्चितता का एक बिंदु बना हुआ है। इन चुनौतियों के बावजूद, Anand Rathi HDFC Bank को उसके दीर्घकालिक क्षमता के मुकाबले उचित मूल्य वाला (Reasonably Valued) मान रहा है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म ने यह भी कहा है कि लार्ज-कैप प्राइवेट बैंकिंग स्पेस में वह अभी भी Axis Bank और ICICI Bank को अधिक तरजीह देती है।
आगे चलकर, निवेशक बैंक की अपने प्रतिस्पर्धियों के साथ मार्जिन के अंतर को कम करने और फंडिंग लागत को कम करने के लिए अपनी डिपॉजिट मोबिलाइजेशन (Deposit Mobilisation) की कोशिशों में सुधार करने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखेंगे। लीडरशिप की स्थिरता और तिमाही मार्जिन ट्रेंड पर भविष्य के अपडेट बैंक के रिकवरी पाथ (Recovery Path) पर और स्पष्टता प्रदान करेंगे।
