Anand Rathi के प्रदीप गुप्ता ने निवेशकों को अगले दो से छह महीनों तक सतर्क रहने की सलाह दी है। ग्लोबल अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की निकासी के चलते बाजार में दबाव बना रह सकता है, हालांकि लंबी अवधि के लिए भारत की विकास गाथा अभी भी मजबूत है।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक अनिश्चित दौर से गुजर रहा है, जिसके चलते दिग्गज बाजार विशेषज्ञ भी अब सतर्क रुख अपना रहे हैं। Anand Rathi Share and Stock Brokers के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, प्रदीप गुप्ता ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे अगले 2 से 6 महीने तक 'डिफेंसिव' मोड में रहें। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की लंबी अवधि की तस्वीर अभी भी बेहद मजबूत दिख रही है, जिसे लगातार GDP ग्रोथ और सरकार के बुनियादी ढांचे पर बढ़ते खर्च का समर्थन मिल रहा है।
बाजार पर क्यों है दबाव?
बाजार में इस सावधानी के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। सबसे बड़ी चिंता US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का बढ़ना है, जो अब लगभग 5.34% के स्तर पर पहुंच गई है। जब ग्लोबल बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक अक्सर उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख करते हैं। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता ने सप्लाई चेन के लिए नया जोखिम पैदा कर दिया है, जिसका असर महंगाई और घरेलू उपभोग पर पड़ सकता है।
रुपये में गिरावट और बाजार की उम्मीदें
आर्थिक जटिलताओं में भारतीय रुपये का 96 के करीब पहुंचना भी एक चुनौती है। करेंसी में कमजोरी के कारण उन कंपनियों की लागत बढ़ सकती है जो आयात पर निर्भर हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग सेक्टर पर फोकस भविष्य के लिए सकारात्मक है। अब निवेशकों की नजरें दूसरी तिमाही (Q2) के कॉरपोरेट रिजल्ट्स पर टिकी हैं। अगर नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो बाजार का सेंटीमेंट सुधर सकता है और विदेशी पूंजी की वापसी की राह खुल सकती है। साथ ही, RBI की ब्याज दरों पर पॉलिसी और मॉनसून का ग्रामीण मांग पर असर भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
