जुलाई 2026 तक Nifty 500 कंपनियों के लिए एनालिस्ट्स की 'Buy' रेटिंग बढ़कर लगभग 70% हो गई है, जो 2025 के अंत में 66.1% थी। यह बढ़त कॉर्पोरेट कमाई और घरेलू मांग में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। इंश्योरेंस, होटल और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में जहां काफी उम्मीदें हैं, वहीं कुछ रियल एस्टेट इलाकों में वैल्यूएशन बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है।
Detailed Coverage
भारतीय शेयर बाज़ार में बढ़ा भरोसा
जुलाई 2026 तक भारतीय शेयर बाज़ार के सेंटीमेंट में एक बड़ा बदलाव आया है। Nifty 500 कंपनियों के लिए एनालिस्ट्स की 'Buy' रेटिंग बढ़कर करीब 70% हो गई है, जबकि दिसंबर 2025 के अंत में यह 66.1% थी। यह बढ़त बेहतर कमाई की उम्मीदों, वाजिब वैल्यूएशन्स और घरेलू खपत में स्थिरता का मिलाजुला नतीजा है।
वैल्यूएशन्स और सेक्टर का ट्रेंड
बाजार का मौजूदा प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो करीब 20.65 गुना है, जो 10 साल के औसत 23.4 गुना से कम है। वैल्यूएशन्स में यह अंतर एनालिस्ट्स के बीच भारतीय इक्विटी के प्रति पॉजिटिविटी की एक बड़ी वजह है, खासकर तब जब भारतीय बाज़ार हाल के दिनों में ग्लोबल इंडेक्स की तुलना में थोड़ा पीछे रहा है। सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले सेक्टर्स में लाइफ इंश्योरेंस और एसेट मैनेजमेंट कंपनियां शामिल हैं। भारत में फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की कम पैठ को देखते हुए इनमें लंबी अवधि में ग्रोथ की काफी गुंजाइश है।
खास सेक्टर्स में मजबूत विश्वास
इंश्योरेंस कंपनियां फिलहाल सबसे ज्यादा पसंदीदा हैं। नौ प्रमुख कंपनियों के लिए 'Buy' कॉल 169 से बढ़कर 214 हो गई है, जो कुल रिकमेन्डेशन्स का 93% है। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर भी इस लिस्ट में ऊपर है, जहां 90.8% रिकमेन्डेशन्स 'Buy' पोजीशन के पक्ष में हैं। इसी तरह, हेल्थकेयर फैसिलिटीज और रियल एस्टेट डेवलपर्स को भी पॉजिटिव कवरेज में बढ़त मिली है, जिसका आधार बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम और क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर व सर्विसेज़ की मांग है।
SBI Life Insurance, Max Financial Services, DLF, Kalpataru Projects International, Aadhar Housing Finance, और Leela Palaces Hotels & Resorts जैसी कई कंपनियों को एनालिस्ट्स से लगातार 'Buy' रेटिंग मिली है। इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे कई विविध क्षेत्रों में यह व्यापक रुचि देखी जा रही है।
जोखिम और सावधानी
कुल मिलाकर पॉजिटिव सेंटीमेंट के बावजूद, एनालिस्ट्स सेलेक्टिविटी (चयन) पर जोर दे रहे हैं। रियल एस्टेट सेक्टर में, मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन कुछ इलाकों में प्राइस एप्रिसिएशन के कारण वैल्यूएशन्स थोड़े महंगे हो गए हैं। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि 'Buy' रिकमेन्डेशन्स भविष्य की अनुमानित कमाई पर आधारित हैं, जो इंटरेस्ट रेट्स, महंगाई और कच्चे माल की लागत जैसे बड़े मैक्रो फैक्टर्स के आधार पर बदल सकती हैं। चूँकि ये सेक्टर आर्थिक विकास पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं, इसलिए घरेलू मांग में किसी भी मंदी या रेगुलेटरी पॉलिसी में बदलाव से इन ग्रोथ उम्मीदों के अमल पर असर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए अगली बड़ी चीज आने वाले तिमाही नतीजे होंगे, जो यह पुष्टि करेंगे कि कमाई की ये उम्मीदें असल परफॉरमेंस में तब्दील होती हैं या नहीं।
