Ambit Institutional Equities के नितिन भसीन का मानना है कि Nifty 50 में अगले एक साल में सीमित **5% से 7%** तक की बढ़त ही देखने को मिल सकती है। **2026** में अब तक इंडेक्स में **13%** की गिरावट आ चुकी है और विदेशी निवेशकों की निकासी ने बाजार को 'सेलेक्टिव' मोड में डाल दिया है।
अर्निंग्स और वैल्यूएशन का फासला
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कंपनियों के अर्निंग्स और मौजूदा स्टॉक कीमतों के बीच का अंतर है। जहां Nifty 100 कंपनियों की अर्निंग्स में 12% से 13% तक की ग्रोथ का अनुमान है, वहीं स्टॉक की कीमतें पहले से ही ऊंचे लेवल पर ट्रेड कर रही हैं। आसान शब्दों में कहें तो, निवेशकों ने भविष्य की ग्रोथ का प्रीमियम पहले ही चुका दिया है, जिससे आगे बड़ी तेजी की गुंजाइश कम बची है।
विदेशी पूंजी का रुख
कभी भारतीय बाजार के ड्राइवर रहे विदेशी निवेशक अब बेहद सतर्क हो गए हैं। 2026 के अगस्त और सितंबर में एफआईआई (FII) ने रिकॉर्ड बिकवाली की है। अब विदेशी कैपिटल अमेरिका, जापान (सेमीकंडक्टर सेक्टर के कारण) और चीन जैसे मार्केट्स में अधिक आकर्षित दिख रही है।
ओवरसप्लाई और ग्लोबल दबाव
बाजार पर एक बड़ा दबाव आईपीओ (IPO) और इक्विटी सेल्स की बाढ़ का भी है, जहां प्रमोटर्स और प्राइवेट इक्विटी फर्म्स अपना हिस्सा बेच रहे हैं। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में जियो-पॉलिटिकल तनाव और $100 प्रति बैरल के आसपास मंडराते ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतों ने कॉरपोरेट मुनाफे और भारत के इंपोर्ट बिल पर खतरा पैदा कर दिया है।
निवेशकों के लिए सलाह
अब यह बाजार 'सब कुछ ऊपर जाने' वाला नहीं रहा, बल्कि यह 'स्टॉक-पिकर्स मार्केट' बन चुका है। सफलता उन्हीं कंपनियों में मिलेगी जो इन तमाम चुनौतियों के बीच अपनी अर्निंग्स ग्रोथ को बरकरार रख सकेंगी। निवेशकों को कंपनियों के मार्जिन और FIIs के फ्लो पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
