Ambit Equities का मानना है कि Nifty 50 अब अपने सपोर्ट ज़ोन के करीब है, जिससे गिरावट सीमित रह सकती है। हालांकि, ब्रोकरेज ने स्मॉल और मिड-कैप शेयरों में महंगे वैल्यूएशन और महंगाई को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
बाजार की मौजूदा स्थिति
Ambit Institutional Equities की रिपोर्ट के अनुसार, Nifty 50 इंडेक्स अब 20 गुना ट्रेलिंग अर्निंग्स (Trailing Earnings) के वैल्यूएशन पर पहुंच चुका है, जो एक मजबूत सपोर्ट लेवल माना जा रहा है। ब्रोकरेज का मानना है कि ग्लोबल अनिश्चितता और हाई इंटरेस्ट रेट्स के बावजूद इंडेक्स में अब ज्यादा गिरावट की गुंजाइश कम है। मजबूत घरेलू निवेश (Domestic Investment Flows) बाजार को स्थिरता देने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
स्मॉल और मिड-कैप पर दबाव
जहां बड़े शेयरों में स्थिरता दिख रही है, वहीं स्मॉल और मिड-कैप सेगमेंट के लिए राह कठिन है। बढ़ती इनपुट कॉस्ट के कारण कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा, इन शेयरों के वैल्यूएशन काफी ऊंचे हैं, जो अर्निंग्स ग्रोथ सुस्त होने पर नहीं टिक पाएंगे। महंगाई के दौर में छोटी कंपनियां बड़े कॉरपोरेट्स की तुलना में अपनी प्रॉफिटेबिलिटी बचाने में संघर्ष कर सकती हैं।
कहाँ दिख रहे हैं अवसर?
ब्रोकरेज ने लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को पसंद किया है। सरकार की घरेलू उत्पादन बढ़ाने की नीतियां इन सेक्टर्स के लिए सपोर्ट का काम कर रही हैं। इसके अलावा, बैंकिंग सेक्टर भी रिकवरी के लिए तैयार दिख रहा है। बैंक निफ्टी अपने प्रॉफिट कॉन्ट्रिब्यूशन की तुलना में बाजार में कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं, जो निवेशकों के लिए एक डिस्काउंट का मौका हो सकता है।
चुनौतियां और जोखिम
बाजार को अभी कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना है:
- बढ़ती इंपोर्ट कॉस्ट और FDI में सुस्ती का असर GDP पर दिख रहा है।
- महंगाई के कारण RBI के पास ब्याज दरों में कटौती की सीमित जगह है।
- 'अल नीनो' (El Niño) जैसा फैक्टर कृषि और खपत को प्रभावित कर सकता है।
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां किस तरह बढ़ती महंगाई के बीच अपने मुनाफे को बचा पाती हैं।
