ICICI Securities ने Akums Drugs का टारगेट प्राइस बढ़ाकर **₹850** कर दिया है। यह फैसला कंपनी के Q1 FY27 के शानदार नतीजों के बाद आया है, जिसमें मुनाफा बढ़कर **₹101 करोड़** हो गया। कंपनी का CDMO बिज़नेस ग्रोथ का बड़ा ज़रिया बना हुआ है, लेकिन निवेशकों को डोमेस्टिक सेगमेंट में मार्जिन दबाव और टैक्स लिटिगेशन जैसे उभरते जोखिमों पर भी नज़र रखनी चाहिए।
ICICI Securities का 'Buy' रेटिंग के साथ टारगेट में बढ़ोतरी
ICICI Securities ने Akums Drugs and Pharmaceuticals पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए, इसके टारगेट प्राइस को ₹680 से बढ़ाकर ₹850 कर दिया है। यह बढ़ोतरी कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजों के बाद आई है। इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 13.9% बढ़कर ₹1,167 करोड़ रहा।
₹101 करोड़ का मुनाफा और CDMO की दमदार ग्रोथ
फार्मा कंपनी ने तिमाही के लिए ₹101 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹65 करोड़ था। इस शानदार परफॉर्मेंस का एक मुख्य कारण कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CDMO) सेगमेंट रहा, जिसने रेवेन्यू में 18.6% की ग्रोथ दर्ज की। ब्रोकरेज फर्म ने यह भी बताया कि कॉस्ट मैनेजमेंट में सुधार के चलते EBITDA मार्जिन बढ़कर 15.0% हो गया, जो पिछले साल 12.6% था।
विस्तार की योजनाएं और नए बाज़ार
रणनीतिक विस्तार कंपनी का एक अहम फोकस बना हुआ है। Akums ने हाल ही में Oriflame India के मैन्युफैक्चरिंग बिज़नेस को ₹56 करोड़ में अधिग्रहित करने की घोषणा की है। इस कदम से कंपनी की कॉस्मेटिक्स और वेलनेस प्रोडक्ट कैटेगरी में मौजूदगी मजबूत होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रोथ की ओर देखते हुए, Akums फाइनेंशियल ईयर 2027 की तीसरी तिमाही से शुरू होने वाले 25 मिलियन USD के जाम्बिया के लिए नए शिपमेंट्स तैयार कर रहा है, साथ ही यूरोपीय बाज़ार में भी विस्तार की योजना है।
निवेशकों को किन जोखिमों पर रखनी चाहिए नज़र?
ग्रोथ के सकारात्मक आउटलुक के बावजूद, निवेशकों को कई ऑपरेशनल और फाइनेंशियल चुनौतियों से अवगत रहना चाहिए। CDMO बिज़नेस में ग्रोथ तो है, लेकिन पिछले कुछ तिमाहियों की तुलना में इसकी रफ़्तार धीमी पड़ती दिख रही है। इसके अलावा, कंपनी डोमेस्टिक ब्रांडेड फॉर्मूलेशन बिज़नेस में मार्जिन में कमी का सामना कर रही है, जहां मार्जिन 449 बेसिस पॉइंट्स गिर गए। API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट) सेगमेंट भी नुकसान और रेवेन्यू में गिरावट दर्ज कर रहा है, जिसका एक कारण बाज़ार में प्राइस वोलेटिलिटी है।
टैक्स लिटिगेशन और भविष्य की राह
इसके अलावा, कंपनी रेगुलेटरी और लीगल अनिश्चितताओं से भी निपट रही है। Akums ने ₹156 करोड़ के इनकम टैक्स असेसमेंट ऑर्डर से जुड़ी एक कंटिंजेंट लायबिलिटी का खुलासा किया है, जो फिलहाल अपील में है। हालांकि कंपनी की नेट कैश पोजीशन मजबूत है और उस पर कोई कर्ज नहीं है, लेकिन इस टैक्स लिटिगेशन का नतीजा एक अहम मॉनिटरेबल बना रहेगा।
भविष्य में स्टॉक का परफॉरमेंस इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी अपने CDMO ग्रोथ मोमेंटम को बनाए रख पाती है या नहीं, और साथ ही अपने संघर्षरत सेगमेंट्स में प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे मैनेज करती है। निवेशकों की नज़रें आने वाले अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट्स, हाल ही में अधिग्रहित Oriflame बिज़नेस के इंटीग्रेशन और लंबित टैक्स लिटिगेशन से जुड़े किसी भी अपडेट पर बनी रहेंगी।
