भारत में कम मॉनसून के कारण एग्रोकेमिकल कंपनियों के लिए सितंबर तिमाही काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाली है। **12.2%** की बारिश की कमी से फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड्स की मांग बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे Coromandel International और PI Industries जैसी दिग्गज कंपनियों के मार्जिन में बड़ी गिरावट की आशंका है।
भारत में कृषि रसायन (Agrochemical) कंपनियां फाइनेंशियल ईयर 2027 की सितंबर तिमाही में भारी मुश्किलों का सामना कर रही हैं। देश में मॉनसून सामान्य से 12.2% कम रहा है, जिसका सीधा असर पश्चिमी और दक्षिणी भारत के कृषि क्षेत्रों में मिट्टी की नमी और फसल की सेहत पर पड़ा है। इसके चलते खाद और कीटनाशकों की मांग में भारी कमी दर्ज की गई है।
मुनाफे पर दबाव और ब्रोकरेज की चेतावनी
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि सेक्टर की प्रमुख लिस्टेड कंपनियों के रेवेन्यू में साल-दर-साल 12% तक की गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, EBITDA में भारी कटौती देखने को मिल सकती है। उदाहरण के लिए, Coromandel International के EBITDA में 56% तक की बड़ी गिरावट का अनुमान लगाया गया है। वहीं PI Industries, Rallis India और Sumitomo Chemical India जैसी कंपनियां भी मार्जिन के मोर्चे पर जूझती नजर आएंगी।
मुनाफा घटने की मुख्य वजहें
कंपनियों के लिए दोहरी मुसीबत है—कम डिमांड और ऊंचे खर्चे।
- इन्वेंट्री की समस्या: कंपनियों के पास पुराने महंगे स्टॉक जमा हैं।
- कीमतें बढ़ाने में असमर्थ: मांग कमजोर होने के कारण ये कंपनियां अपनी लागत का बोझ किसानों पर नहीं डाल पा रही हैं।
- ओवरहेड्स: कच्चे तेल की कीमतों और लॉजिस्टिक्स के ऊंचे खर्चों ने मुनाफे को निचोड़ दिया है।
आगे की राह
हालांकि Dhanuka Agritech और Bayer CropScience जैसे खिलाड़ियों का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बेहतर होने के कारण वे तुलनात्मक रूप से सुरक्षित रह सकते हैं, लेकिन पूरे सेक्टर के लिए आउटलुक अभी भी सतर्कता वाला है। ब्रोकरेज हाउस ने इस फाइनेंशियल ईयर के लिए अपनी अर्निंग्स अनुमान घटा दिए हैं। जानकारों का कहना है कि सेक्टर में सुधार की उम्मीद 2027 की पहली छमाही से पहले मुश्किल है। निवेशकों को फिलहाल डीलर इन्वेंट्री क्लियरेंस और रॉ मटेरियल की कीमतों पर नजर रखनी चाहिए।
