PL Capital के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) की कमाई में केवल **10%** की सुस्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। घटते इक्विटी इनफ्लो और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, निवेशकों का झुकाव मिड और स्मॉल-कैप फंड्स की ओर बढ़ा है। हालांकि, लंबी अवधि के लिए ब्रोकरेज ने **16%** मुनाफे की ग्रोथ का अनुमान जताया है।
मुनाफे पर दबाव की वजह
ब्रोकरेज फर्म PL Capital की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय एसेट मैनेजमेंट सेक्टर के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वित्त वर्ष 2027 में कंपनियों का कोर प्रॉफिट ग्रोथ घटकर 10% के आसपास रहने का अनुमान है। इसकी मुख्य वजह कमजोर इक्विटी मार्केट और निवेशकों के कम होते फंड फ्लो को माना जा रहा है।
बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
इंडस्ट्री में बड़े खिलाड़ियों का दबदबा कम होता दिख रहा है। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच, नेट इक्विटी इनफ्लो में टॉप 3 फंड हाउसों की हिस्सेदारी गिरकर 34% रह गई है, जो वित्त वर्ष 2026 में 42% थी। इसी तरह, टॉप 10 खिलाड़ियों की हिस्सेदारी भी 73% से घटकर 65% पर आ गई है। इससे साफ है कि मिड और स्मॉल-साइज फंड हाउस मार्केट में अपनी जगह बना रहे हैं, जिससे फीस और डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
निवेशकों की बदली पसंद
आजकल निवेशक उन्हीं फंड्स की ओर भाग रहे हैं जिन्होंने हाल ही में बेहतर रिटर्न दिया है। लार्ज-कैप और थीमेटिक स्कीमों से पैसा निकलकर फ्लेक्सी-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स की तरफ जा रहा है। हालांकि, अगस्त 2026 तक इंडस्ट्री का AUM ₹87.1 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है, लेकिन इन वोलेटाइल कैटेगरी में ज्यादा निवेश फंड मैनेजर्स के लिए रिस्क बढ़ा सकता है।
आगे की राह
उम्मीद की किरण अभी बरकरार है। PL Capital का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 से 2029 के बीच लिस्टेड एसेट मैनेजर्स 16% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से मुनाफा कमा सकते हैं। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या दिग्गज फंड हाउस अपनी मार्केट शेयर बचा पाते हैं या नहीं।
