ग्लोबल टेंशन और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते बाजार में भारी बिकवाली हुई है, जिससे Nifty 500 के 32 स्टॉक्स 'Oversold' जोन में आ गए हैं। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है क्योंकि तकनीकी संकेतक अकेले खरीदारी का आधार नहीं हो सकते।
ग्लोबल मार्केट में बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतों में तेजी का असर भारतीय बाजार पर साफ दिख रहा है। 10 सितंबर, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, Nifty 50 इंडेक्स 2.8% फिसलकर 23,410 पर आ गया है, जबकि व्यापक Nifty 500 इंडेक्स 2.3% की गिरावट के साथ 22,915 पर बंद हुआ है।
Oversold जोन की चपेट में दिग्गज स्टॉक्स
बाजार की इस भारी गिरावट ने 32 Nifty 500 कंपनियों को 'Oversold' जोन में धकेल दिया है। इनमें HDFC Bank, Asian Paints, Dabur India, Lupin, Maruti Suzuki और UltraTech Cement जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। टेक्निकल भाषा में, RSI का स्तर 30 या उससे नीचे आने का मतलब है कि इन शेयरों में भारी सेलिंग प्रेशर देखा गया है।
क्या यह खरीदारी का संकेत है?
अक्सर ट्रेडर्स RSI को खरीदारी का मौका मानते हैं, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स की राय अलग है। RSI का 30 से नीचे होना केवल पुरानी मोमेंटम को दर्शाता है, यह इस बात की गारंटी नहीं देता कि शेयर की कीमत में तुरंत रिकवरी आएगी। अगर सेलिंग प्रेशर बना रहता है, तो स्टॉक लंबे समय तक इस जोन में बने रह सकते हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
अभी निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम यह है कि वे बाजार की अफरा-तफरी और कंपनी के अंदरूनी बिजनेस की दिक्कतों के बीच अंतर करें। अगर गिरावट सिर्फ क्रूड ऑयल या मार्केट सेंटिमेंट की वजह से है, तो बाजार संभलते ही रिकवरी संभव है। लेकिन, अगर गिरावट के पीछे कमजोर अर्निंग्स या कर्ज की समस्या है, तो तकनीकी चार्ट देखकर फंसना गलत हो सकता है।
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि सिर्फ RSI के भरोसे बॉटम तलाशने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स जैसे रेवेन्यू, प्रॉफिट मार्जिन और डेट लेवल पर नजर रखें। 'Higher Lows' पैटर्न का इंतजार करना और धैर्य रखना ही मौजूदा मार्केट में समझदारी भरी रणनीति है।
