Yes Bank ने Q2 में **₹1,080 करोड़** का शानदार मुनाफा दर्ज किया है, लेकिन एक अदालती फैसले ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अगर AT1 बॉन्ड की **₹8,415 करोड़** की देनदारी को जोड़ दिया जाए, तो बैंक मुनाफे के बजाय **₹5,217 करोड़** के भारी नुकसान में होगा।
ऑपरेशनल मोर्चे पर दमदारी
यस बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजे पेश किए हैं। बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 65% बढ़कर ₹1,080 करोड़ पर पहुंच गया है। इस ग्रोथ के पीछे नेट इंटरेस्ट इनकम में 22.7% का उछाल रहा, जो ₹2,822 करोड़ रही। वहीं, लोन से मिलने वाली ब्याज आय 17.2% बढ़कर ₹6,600 करोड़ रही है।
एसेट क्वालिटी में सुधार
बैंक का बिजनेस वॉल्यूम भी तेजी से बढ़ा है। बैंक का कुल एडवांस (Loans) 23.7% बढ़कर ₹3.10 लाख करोड़ हो गया है, जबकि डिपॉजिट्स 19.5% बढ़कर ₹3.54 लाख करोड़ पर पहुंच गए। बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार दिखा है; ग्रॉस NPA गिरकर 1.2% पर आ गया है, जो एक साल पहले 1.6% था। नेट NPA भी घटकर 0.2% रह गया है।
AT1 बॉन्ड का कानूनी संकट
ऑपरेशनल नतीजों के बीच एक बड़ा कानूनी रिस्क बैंक के ऊपर मंडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2020 के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें ₹8,415 करोड़ के AT1 बॉन्ड्स को राइट-डाउन (Write-down) किया गया था।
बैंक ने अभी इस देनदारी को अपनी तिमाही बैलेंस शीट में शामिल नहीं किया है, जिस पर स्टैच्युटरी ऑडिटर्स ने भी सवाल उठाए हैं। बैंक के प्रो-फॉर्मा डिस्क्लोजर के अनुसार, अगर इस कानूनी फैसले का असर नतीजों में एडजस्ट किया जाता, तो बैंक को ₹1,080 करोड़ के प्रॉफिट की जगह ₹5,217 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ता। फिलहाल बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 14.5% पर है।
आगे क्या?
शेयरधारकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह देखना है कि बैंक मैनेजमेंट इस कानूनी और वित्तीय चुनौती से कैसे निपटता है। बैंक अभी अपने लीगल ऑप्शंस को इवैल्यूएट कर रहा है। भविष्य में इस देनदारी का बैंक की लिक्विडिटी और ग्रोथ पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना निवेश की दृष्टि से बेहद जरूरी होगा।
