Yes Bank ने अंतर्राष्ट्रीय डॉलर बॉन्ड के ज़रिए **$850 मिलियन** (लगभग ₹7,000 करोड़) जुटाने की पहल की है। यह साल 2020 में AT1 बॉन्ड राइट-ऑफ के बाद बैंक की पहली विदेशी मुद्रा ऋण बिक्री होगी। RBI की कंसेशनल फॉरेक्स स्वैप विंडो का फायदा उठाते हुए, यह कदम बैंक की रिकवरी को दर्शाता है, हालांकि निवेशक पिछले ऋण रद्दीकरण से संबंधित चल रहे सुप्रीम कोर्ट के मुकदमे पर भी बारीकी से नज़र रख रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में Yes Bank की वापसी
Yes Bank एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ऋण बाज़ार में कदम रख रहा है। बैंक ने $850 मिलियन के मीडियम टर्म नोट (MTN) प्रोग्राम के तहत फंड जुटाने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए बैंक 17 अगस्त से 24 अगस्त 2026 तक वैश्विक फिक्स्ड-इनकम निवेशकों के साथ वर्चुअल मीटिंग करेगा। यह कदम बैंक के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, क्योंकि 2020 के पुनर्गठन के बाद यह पहली बार है जब बैंक डॉलर-आधारित विदेशी मुद्रा ऋण के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का रुख कर रहा है।
RBI की कंसेशनल विंडो का उठाया जा रहा फायदा
इस फंड-रेज़िंग का समय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की एक खास पहल से प्रभावित है। केंद्रीय बैंक तीन साल से अधिक की अवधि वाले विदेशी मुद्रा उधार पर कंसेशनल स्वैप प्रीमियम की पेशकश कर रहा है। यह पॉलिसी, जिसका मकसद भारतीय बैंकों को विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में मदद करना है, 31 दिसंबर 2026 को समाप्त हो जाएगी। इसी का फायदा उठाते हुए HDFC Bank, Kotak Mahindra Bank, Federal Bank और RBL Bank जैसे अन्य निजी बैंक भी कम लागत वाले डॉलर फंड जुटा रहे हैं।
बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार
संकट के दौर के बाद Yes Bank की वित्तीय स्थिति में बदलाव आया है। बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ₹11 बिलियन का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। बैंक का कॉमन इक्विटी टियर 1 (CET-1) रेशियो, जो बैंक की कोर कैपिटल मजबूती का पैमाना है, 14.0% पर बना हुआ है। एसेट क्वालिटी में भी सुधार देखा गया है, जिसमें ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रेशियो 1.3% बताया गया है। नए डॉलर नोट्स को मूडीज़ (Moody’s) ने Ba1 और एसएंडपी (S&P) ने BB+ की रेटिंग दी है, जो इन्हें इन्वेस्टमेंट ग्रेड से ठीक नीचे रखती है।
निवेशकों के लिए जोखिम और आगे की राह
सुधारों के बावजूद, बैंक अभी भी कुछ जोखिमों का सामना कर रहा है जिन पर निवेशकों को नज़र रखनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण है मार्च 2020 में बैंक के एडिशनल टियर 1 (AT1) बॉन्ड के परमानेंट राइट-ऑफ से संबंधित सुप्रीम कोर्ट में चल रहा मुकदमा। यह अनसुलझा कानूनी मामला अनिश्चितता का एक बिंदु बना हुआ है। इसके अलावा, बाहरी फाइनेंसिंग पर बैंक की निर्भरता उसे वैश्विक बाज़ार की अस्थिरता के प्रति संवेदनशील बनाती है। जब 2026 के अंत में RBI की कंसेशनल स्वैप विंडो बंद हो जाएगी, तो बैंक को नियामक समर्थन के बिना करेंसी हेजिंग लागत का प्रबंधन करना होगा, जो अगर कुशलता से प्रबंधित न हो तो भविष्य की लाभप्रदता को प्रभावित कर सकता है।
निवेशकों के लिए अगला कदम 24 अगस्त को निवेशक बैठकों का समापन और उसके बाद बॉन्ड इश्यू की अंतिम प्राइसिंग और लॉन्च होगा। बाज़ार के प्रतिभागी इस बात पर ध्यान देंगे कि बैंक को अंतिम ब्याज दर क्या मिलती है, क्योंकि यह बैंक के टर्नअराउंड और क्रेडिट प्रोफाइल में वैश्विक निवेशक के विश्वास को दर्शाएगी।
