सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े आदेश के बाद Yes Bank को **₹8,415 करोड़** के AT1 बॉन्ड को फिर से अपनी देनदारियों में शामिल करना होगा। इस बदलाव के चलते बैंक का CET1 कैपिटल रेश्यो **240 बेसिस पॉइंट्स** गिरकर **11.4%** पर आ गया है, जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है।
कैपिटल बफर पर क्या पड़ेगा असर?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने बैंक के फाइनेंशियल स्ट्रक्चर को पूरी तरह से बदल दिया है। साल 2020 में रिस्ट्रक्चरिंग के दौरान जिन AT1 बॉन्ड्स को राइट-डाउन (Write-down) कर दिया गया था, उन्हें अब वापस बैंक के रिजर्व से हटाकर लायबिलिटीज में दिखाना होगा। हालांकि बैंक का कुल Tier 1 कैपिटल रेश्यो 13.7% के आसपास रहने की उम्मीद है, जो रेगुलेटरी मानकों से ऊपर है, लेकिन बफर कम होने के कारण बैंक की भविष्य में आक्रामक लोन ग्रोथ क्षमता सीमित हो सकती है।
क्यों घबराए निवेशक?
बाजार को सबसे ज्यादा डर 'इक्विटी डाइल्यूशन' (Equity Dilution) का है। निवेशकों को आशंका है कि कैपिटल बफर को दोबारा मजबूत करने के लिए बैंक को नई इक्विटी जारी करनी पड़ सकती है, जिससे मौजूदा शेयरधारकों की वैल्यू घट सकती है। हालांकि, बैंक मैनेजमेंट ने साफ किया है कि फिलहाल यह केवल एक अकाउंटिंग बदलाव है और बॉन्डहोल्डर्स को तुरंत कैश देने की कोई जरूरत नहीं है।
आगे की राह
बैंक मैनेजमेंट अब भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कैपिटल जुटाने की योजनाओं पर काम कर रहा है। सितंबर तिमाही में बैंक के एडवांसेज में 23.7% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसे बनाए रखना अब एक बड़ी प्राथमिकता होगी। बता दें कि जापान की Sumitomo Mitsui Banking Corp की बैंक में 24.9% हिस्सेदारी है। आने वाले समय में मैनेजमेंट की बैलेंस शीट को मजबूत करने की स्ट्रैटेजी पर ही निवेशकों की नजर टिकी रहेगी।
