Yes Bank के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। AT1 बॉन्ड होल्डर्स एसोसिएशन ने बैंक को **₹8,415 करोड़** के राइट-ऑफ किए गए बॉन्ड्स को वापस लाने के लिए केवल **3 दिन** का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह मामला बैंक के कैपिटल स्ट्रक्चर के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अक्टूबर 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखने के बाद, AT1 बॉन्ड होल्डर्स का गुस्सा बढ़ गया है। एसोसिएशन ने बैंक को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे ₹8,415 करोड़ के उन बॉन्ड्स को फिर से बहाल करें जिन्हें बैंक के 2020 के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान राइट-ऑफ कर दिया गया था।
बैंक के कैपिटल पर संकट
इन बॉन्ड्स की वापसी Yes Bank के फाइनेंशियल हेल्थ के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकती है। जानकारों का कहना है कि अगर ये बॉन्ड्स बहाल होते हैं, तो बैंक का CET1 कैपिटल रेशियो लगभग 240 बेसिस पॉइंट्स गिरकर 11.4% तक आ सकता है। इसके अलावा, बैंक को सालाना करीब ₹770 करोड़ का कूपन पेमेंट भी करना पड़ेगा। इसी चिंता के चलते ब्रोकरेज फर्म JPMorgan ने बैंक का टारगेट प्राइस घटाकर ₹13.10 कर दिया है।
क्या है बैंक का पक्ष?
Yes Bank ने कोर्ट के आदेश की अवमानना के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बैंक का कहना है कि वह कानूनी और ऑपरेशनल पेचीदगियों का आकलन कर रहा है ताकि नियमों का सही पालन हो सके। हालांकि, बॉन्ड होल्डर्स डिपॉजिटरीज में एंट्रीज को तुरंत रिवर्स करने और ट्रेडिंग शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
निवेशकों की बढ़ती मुश्किलें
इस मामले का एक मानवीय पहलू भी है। जिन 1,346 व्यक्तिगत निवेशकों ने ये बॉन्ड्स खरीदे थे, उनमें से कई रिटायर्ड लोग हैं जिन्होंने अपनी बचत का पैसा बैंक के भरोसे लगाया था। अब सभी की निगाहें 16 नवंबर को होने वाली बॉन्ड होल्डर्स की मीटिंग पर टिकी हैं कि बैंक बैलेंस शीट को बचाते हुए इन दावों को कैसे पूरा करता है।
