₹1000 करोड़ की धोखाधड़ी का क्या है मामला?
नई FIR में दावा किया गया है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत कीमती संपत्तियों को उनकी बाजार कीमत से काफी कम पर बेचा गया। अगर यह सच साबित होता है, तो यह भारत के बैंकिंग सेक्टर की एसेट क्वालिटी (asset quality) में हालिया सुधार को झटका दे सकता है।
लोन ट्रांसफर की डिटेल्स
शिकायत के अनुसार, Yes Bank ने 2016 में HDIL ग्रुप की Sapphire Land Development Pvt Ltd को ₹150 करोड़ का एक लोन दिया था। FIR के मुताबिक, Yes Bank ने कथित तौर पर इस लोन के रिकवरी राइट्स (recovery rights) Suraksha Asset Reconstruction Company (ARC) को लोन को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित किए बिना और गिरवी रखी संपत्तियों का सही मूल्यांकन किए बिना, दस महीने के भीतर ही ट्रांसफर कर दिए। रिपोर्टों के मुताबिक, इन संपत्तियों की कीमत करीब ₹1,000 करोड़ है। FIR यह भी इशारा करती है कि संकटग्रस्त संपत्तियों को भारी डिस्काउंट पर खरीदने की योजना हो सकती है। इसमें Suraksha ARC को आंतरिक खातों के माध्यम से ₹22.50 करोड़ के मार्जिन मनी (margin money) के हेरफेर का भी आरोप है। Suraksha ARC, सुधीर वालिया द्वारा प्रमोटेड एक बड़ी एसेट रिकंस्ट्रक्शन फर्म है।
कर्जदार की कमजोर वित्तीय स्थिति
Sapphire Land Development की पेड-अप कैपिटल (paid-up capital) सिर्फ ₹5 लाख है और इसका आखिरी बैलेंस शीट 2018 का है। इसकी पैरेंट कंपनी HDIL, अगस्त 2019 से इन्सॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स (insolvency proceedings) से गुजर रही है और इसने फाइनेंशियल ईयर 2026 की पहली छमाही में भारी नुकसान और रेवेन्यू में गिरावट दर्ज की है। इस कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण ही Sapphire की संपत्तियां निशाने पर आईं।
पिछली जांचें और निगरानी
Rana Kapoor पहले भी Enforcement Directorate और CBI जैसी एजेंसियों की जांच का सामना कर चुके हैं, जो 2020 में Yes Bank संकट से जुड़े थे। यह नई FIR, अनुचित संपत्ति हस्तांतरण के पिछले आरोपों के समान है और जमानत पर रिहा होने के बाद उनके कार्यों पर सवाल उठाती है। सुधीर वालिया, अपने फाइनेंशियल विशेषज्ञता के बावजूद, जांच के दायरे में हैं। पिछले व्हिसलब्लोअर (whistleblower) शिकायतों ने वालिया से जुड़ी एक फर्म को उनके द्वारा नियंत्रित कंपनी के साथ ₹5,800 करोड़ के सौदों में जोड़ा है, जिससे संबंधित-पक्ष सौदों (related-party deals) और कंपनी गवर्नेंस (company governance) को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। FIR का यह दावा कि Yes Bank के अधिकारियों ने वालिया के Surekha ARC से संबंधों के बीच, सही मूल्यांकन के बिना लोन के अधिकार ट्रांसफर किए, यह संकेत देता है कि संकटग्रस्त कर्ज के समाधान की जटिलताओं का फायदा उठाकर बाजार मूल्य से कम पर संपत्तियां खरीदने की योजना हो सकती है।
Yes Bank के स्टॉक पर दबाव
Yes Bank का शेयर फिलहाल दबाव में है। विश्लेषकों (analysts) की 'Sell' रेटिंग है और औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस लगभग ₹19.32 है, जो 12% से अधिक की गिरावट का संकेत देता है। बैंक के शेयर फिलहाल ₹22.07 के आसपास कारोबार कर रहे हैं। ये कानूनी समस्याएं, पूर्व नेतृत्व के पिछले मुद्दे और एसेट रिकंस्ट्रक्शन की प्रथाओं पर सवाल, बैंक पर काफी दबाव बना रहे हैं।