सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई संपन्न
सुप्रीम कोर्ट ने Yes Bank के ₹8,415 करोड़ के एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड को राइट-डाउन (मूल्य घटाने) करने के विवादित फैसले पर अपनी सुनवाई पूरी कर ली है। कोर्ट ने 26 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया है। Yes Bank को उम्मीद है कि कोर्ट का फैसला उसके पक्ष में आएगा और उसके फाइनेंशियल्स पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। बैंक का कहना है कि यह राइट-डाउन नियमों और शर्तों के तहत ही किया गया था। हालांकि, बाजार की राय इससे कुछ अलग है।
17 अप्रैल 2026 को Yes Bank का शेयर करीब ₹20.19 पर कारोबार कर रहा था, जिसका मार्केट कैप ₹63,388 करोड़ था। 6 फरवरी और 27 फरवरी 2026 को स्टॉक में भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम (खरीद-बिक्री) देखी गई, लेकिन इससे शेयर की कीमतों में लगातार उछाल नहीं आया। पिछले 52 हफ्तों में शेयर ₹17.20 और ₹24.30 के बीच रहा, जो बताता है कि ट्रेडिंग में दिलचस्पी के बावजूद स्टॉक में ज़्यादा तेजी नहीं दिखी।
AT-1 बॉन्ड क्या होते हैं?
AT-1 बॉन्ड, बैंक के कैपिटल को मजबूत करने के लिए बेसल III (Basel III) नियमों के तहत जारी किए जाने वाले खास फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं। ये नुकसान झेलने वाले बफर (loss-absorbing buffer) की तरह काम करते हैं, जो बैंक के डूबने की स्थिति में इक्विटी से पहले नुकसान को सोख लेते हैं। इन बॉन्ड पर ज़्यादा इंटरेस्ट (yield) मिलता है, लेकिन इनमें प्रिंसिपल (मूलधन) राइट-डाउन या इक्विटी में कन्वर्ट होने का भी बड़ा रिस्क होता है, खासकर तब जब बैंक वित्तीय संकट से गुजर रहा हो। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इन्हें रेगुलेट करता है।
बॉन्डहोल्डर्स की कानूनी चुनौती
बॉन्डहोल्डर्स की कानूनी चुनौती का मुख्य कारण बैंक का मार्च 2020 का संकट है, जब बैंक को बचाने के लिए सरकार को दखल देना पड़ा था। बॉन्डहोल्डर्स का तर्क है कि रीकंस्ट्रक्शन स्कीम लागू होने के बाद एडमिनिस्ट्रेटर (प्रशासक) द्वारा ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड को राइट-डाउन करने का फैसला, कानूनी प्रक्रियाओं और कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों से अलग था। इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी उनकी याचिका पर सहमति जताई थी। बॉन्डहोल्डर्स का कहना है कि सिर्फ RBI ही राइट-डाउन शुरू कर सकता था, प्रशासक नहीं। Yes Bank की पिछली ऑपरेशनल हिस्ट्री को देखें तो पिछले तीन सालों में इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) सिर्फ 5.34% रहा है और इसके कंटिंजेंट लायबिलिटी (आकस्मिक देनदारियां) ₹11,98,820 करोड़ है। एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है, लेकिन वे सतर्क हैं, और 'Sell' रेटिंग के साथ ₹19.36 का एवरेज 12-महीने का प्राइस टारगेट बताता है कि स्टॉक में गिरावट की संभावना है।
भविष्य का रास्ता
Yes Bank को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से फैसला उसके पक्ष में आएगा। लेकिन एनालिस्ट्स की 'Sell' रेटिंग और प्राइस टारगेट यह दर्शाते हैं कि निवेशक अभी भी बैंक को लेकर आशंकित हैं। बैंक के FY26 के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स, जिन्हें 18 अप्रैल 2026 को मंजूरी मिली, उसमें कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं पाई गई। हालांकि, AT-1 बॉन्ड के फैसले का पूरा असर आने वाले समय में ही पता चलेगा। बैंक ने अपने बिजनेस को बढ़ाने और रिटर्न सुधारने के लिए तीन साल की एक स्ट्रेटेजिक प्लान भी पेश की है। इस बड़े कानूनी मामले को सुलझाना निवेशकों का भरोसा वापस पाने के लिए बेहद अहम होगा।
