मुनाफे की राह पर YES Bank
YES Bank की रिकवरी की कहानी में एक बड़ा मोड़ आ रहा है। बैंक ने चालू फाइनेंशियल ईयर के अंत तक 1% Return on Assets (ROA) का लक्ष्य तय किया है। यह दिसंबर तिमाही के 0.9% ROA से ऊपर है, जो पिछली तिमाहियों के 0.6% से एक बड़ी छलांग है। वहीं, पिछले नौ महीनों का एनुअलाइज्ड ROA भी 0.8% हो गया है, जो पहले 0.5% था। बैंक के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) निरंजन बनोडकर का भरोसा है कि बैंक न केवल इस 1% के लक्ष्य को पूरा करेगा, बल्कि अगले फाइनेंशियल ईयर में इसे पार भी कर जाएगा। फिलहाल, बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹66,022 करोड़ है और इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो फरवरी 2026 के मध्य तक करीब 20.80 था। शेयर की कीमत लगभग ₹21.04 के आसपास बनी हुई है।
SMBC के साथ रणनीतिक बदलाव
इस रिकवरी की रणनीति का एक अहम हिस्सा जापान की Sumitomo Mitsui Banking Corporation (SMBC) का बड़ा निवेश है। SMBC ने ₹16,000 करोड़ में बैंक की 24.99% तक की हिस्सेदारी खरीदी है, जिससे वह बैंक का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बन गया है। इस पार्टनरशिप का मकसद SMBC के ग्लोबल नेटवर्क का फायदा उठाकर कॉर्पोरेट बैंकिंग और ट्रेजरी सर्विसेज में ग्रोथ को बढ़ाना है। बैंक की योजना 15% की ग्रोथ रेट बनाए रखने की है, साथ ही प्रॉफिटेबिलिटी को भी तेज़ी से बढ़ाने की। इस स्ट्रेटेजी का एक मुख्य बिंदु पुराने प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) के शॉर्टफॉल्स को दूर करना है। इसके चलते रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (RIDF) का बैलेंस, जो पहले 11% तक पहुंच गया था, अब घटकर 6.9% रह गया है। बैंक का लक्ष्य FY27 तक RIDF एसेट्स को कुल संपत्ति के 5% से नीचे लाना है। जैसे-जैसे ये कम यील्ड वाली संपत्तियां मैच्योर होंगी, बैंक इन फंड्स को ज्यादा यील्ड वाले एडवांसेज़ में लगाएगा। हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि YES Bank का 1% ROA का लक्ष्य निजी क्षेत्र के बैंकों के औसत ROA से कम है, जो हाल के वर्षों में 1.53% से 1.87% के बीच रहा है। वहीं, भारतीय बैंकिंग सेक्टर में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेश्यो अपने कई दशकों के निचले स्तर पर आ गया है, जिसके सितंबर 2025 तक 2.1% से 2.3% रहने का अनुमान है।
विश्लेषकों की चिंताएं
इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, YES Bank के सामने अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं। 11 ब्रोकरेज फर्मों की राय के अनुसार, बैंक के लिए 'Sell' रेटिंग का कंसेंसस बना हुआ है, और उनका औसत 12 महीने का प्राइस टारगेट ₹20.27 है, जो मौजूदा स्तरों से गिरावट का संकेत देता है। यह सावधानी इसलिए है क्योंकि YES Bank का 1% ROA का लक्ष्य अपने निजी क्षेत्र के साथियों, जैसे HDFC Bank (जिसका ROA करीब 1.74% है) और ICICI Bank, के वर्तमान औसत से काफी कम है। इससे पता चलता है कि बैंक अभी भी रिकवरी के दौर में है और इंडस्ट्री के बेंचमार्क तक पहुंचने के लिए उसे काफी लंबा सफर तय करना है। SMBC की हिस्सेदारी से रणनीतिक समर्थन और पूंजी तो मिली है, लेकिन एसेट्स को फिर से संतुलित करने और फंड की लागतों को प्रबंधित करते हुए, उच्च-यील्ड वाले क्षेत्रों में पूंजी को फिर से तैनात करने की प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली है। बैंक की पिछली वित्तीय दिक्कतें, भले ही फिलहाल मुख्य चर्चा में न हों, निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
भविष्य की राह
YES Bank का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपनी स्ट्रेटेजिक रोडमैप को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है, खासकर पुराने RIDF होल्डिंग्स से अधिक लाभदायक वेंचर्स में एसेट्स को री-डिप्लॉय करने में। SMBC का निरंतर समर्थन एक बड़ा बूस्टर साबित होने की उम्मीद है, जो बैंक को अपनी ग्रोथ की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करेगा। निवेशक बैंक की प्रगति पर कड़ी नजर रखेंगे कि वह 1% ROA के निशान को लगातार कैसे पार करता है, जो उसकी रिकवरी की कहानी को मजबूत करने और और अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा। प्रबंधन की आक्रामक ग्रोथ को बढ़ी हुई प्रॉफिटेबिलिटी के साथ संतुलित करने की क्षमता ही बदलते भारतीय वित्तीय परिदृश्य में उसके प्रदर्शन को तय करेगी।