YES Bank ने सितंबर तिमाही के बिजनेस अपडेट्स जारी किए हैं, जिसमें लोन बुक **23.8%** बढ़कर **₹3.09 लाख करोड़** पर पहुंच गई है। हालांकि, CASA रेश्यो का **32.7%** से घटकर **30%** होना बैंक की फंडिंग लागत को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रोथ और हकीकत का अंतर
YES Bank ने सितंबर तिमाही के लिए अपने प्रोविजनल नतीजे पेश किए हैं। बैंक के ग्रॉस लोन और एडवांसेज 23.8% की सालाना बढ़ोतरी के साथ ₹3,09,675 करोड़ रहे, जबकि कुल डिपॉजिट 19.5% बढ़कर ₹3,54,084 करोड़ तक पहुंच गए। हालांकि, मैनेजमेंट ने कुछ 'नॉर्मलाइज्ड' आंकड़े भी साझा किए हैं। अगर हम इसमें से अस्थिर FCNR डिपॉजिट्स को हटा दें, तो तिमाही आधार पर एडवांसेज में 3.3% और डिपॉजिट्स में 6.5% की ही बढ़ोतरी दिखी है।
मार्जिन पर दबाव की आहट
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा अलर्ट CASA (करेंट और सेविंग्स अकाउंट) रेश्यो में आई गिरावट है। यह 32.7% से घटकर 30.0% हो गया है। आसान शब्दों में कहें तो बैंक के पास अब कम लागत वाले फंड्स का हिस्सा कम हो रहा है, जिससे उन्हें महंगे टर्म डिपॉजिट्स पर निर्भर रहना पड़ सकता है। यह स्थिति बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।
लिक्विडिटी और भविष्य की राह
हालांकि फंडिंग लागत को लेकर चुनौतियां हैं, लेकिन बैंक की लिक्विडिटी स्थिति स्थिर है। क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेश्यो में सुधार हुआ है, जो पिछले जून तिमाही के 90.4% से घटकर 87.5% पर आ गया है। इसके अलावा, लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो 131.4% रहा है, जो बताता है कि बैंक के पास किसी भी आकस्मिक कैश जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त पूंजी है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि बैंक आने वाली तिमाहियों में सस्ते रिटेल डिपॉजिट्स को जुटाने में कितनी कामयाबी हासिल करता है।
