YES Bank AT-1 Bonds: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी फंसा पेमेंट, निवेशकों ने RBI का दरवाजा खटखटाया

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
YES Bank AT-1 Bonds: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी फंसा पेमेंट, निवेशकों ने RBI का दरवाजा खटखटाया

YES Bank के AT-1 बॉन्डहोल्डर्स ने RBI को याचिका भेजी है। निवेशकों का आरोप है कि बैंक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद कूपन पेमेंट (Coupon Payments) को टाल रहा है और इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

पेमेंट में देरी का विवाद

YES Bank के एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड्स का मामला एक बार फिर गरमा गया है। अब बॉन्डहोल्डर्स ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से हस्तक्षेप करने की मांग की है। निवेशकों का दावा है कि अक्टूबर 2026 में देय कूपन पेमेंट को बैंक जानबूझकर रोक रहा है। बैंक का कहना है कि वे इंटरनल असेसमेंट (Internal Assessment) प्रक्रिया के जरिए यह तय कर रहे हैं कि ब्याज का भुगतान करना है या नहीं, जिसे निवेशक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन मान रहे हैं।

पुराना विवाद और कानूनी दांव-पेच

याद दिला दें कि मार्च 2020 में बैंक के पुनर्गठन के दौरान इन बॉन्ड्स को राइट-ऑफ (Write-off) कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में स्पष्ट किया था कि कूपन भुगतान मूल 'इनफॉर्मेशन मेमोरेंडम' की शर्तों के अनुसार होने चाहिए। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि ये हाई-रिस्क इंस्ट्रूमेंट्स मुख्य रूप से इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Insurance Companies, Mutual Funds) के लिए थे, न कि आम रिटेल निवेशकों के लिए।

निवेशकों के लिए क्या है चुनौती?

रिटेल निवेशकों के लिए अब सबसे बड़ा डर यह है कि बैंक अपनी डिस्क्रीशनरी पावर (Discretionary Power) का इस्तेमाल कर भुगतान को अनिश्चितकाल के लिए टाल सकता है। बॉन्डहोल्डर्स चाहते हैं कि RBI इस मामले में दखल दे और बैंक को जवाबदेह ठहराए। फिलहाल, बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या आरबीआई एक समयबद्ध रोडमैप तैयार करेगा, जो बैंक के भुगतान की सीमाओं को तय कर सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.