YES BANK की झोली में शानदार नतीजे, प्रॉफिट में 55.4% की धांसू बढ़त
YES BANK ने Q3FY26 के लिए अपने तिमाही नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसने बाजार में धूम मचा दी है। बैंक ने ₹952 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 55.4% ज्यादा है। इस दमदार परफॉर्मेंस के पीछे नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 10.9% का इजाफा हुआ है, जो अब ₹2,466 करोड़ हो गई है। साथ ही, ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी 14.3% की शानदार ग्रोथ देखने को मिली और यह ₹1,234 करोड़ रहा।
एसेट क्वालिटी में सुधार और मजबूत कैपिटल रेश्यो
बैंक ने अपनी एसेट क्वालिटी में भी लगातार सुधार दिखाया है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) घटकर 1.5% पर आ गए हैं, जबकि नेट एनपीए (Net NPA) सिर्फ 0.3% पर हैं। यह दर्शाता है कि बैंक की लोन बुक की सेहत सुधर रही है। इसके अलावा, कैपिटल एडिक्वेसी यानी CET1 रेश्यो 13.9% के मजबूत स्तर पर बना हुआ है, जो भविष्य में ग्रोथ और रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है।
टर्नअराउंड स्ट्रैटेजी का दिख रहा असर
YES BANK की यह शानदार परफॉर्मेंस बैंक की सफल टर्नअराउंड स्ट्रैटेजी को दर्शाती है। डिजिटल बैंकिंग और रिटेल सेगमेंट पर फोकस, LIC जैसी कंपनियों के साथ हुए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, और सबसे बड़े शेयरहोल्डर SMBC से मिले ग्लोबल एक्सपर्टीज और फाइनेंशियल सपोर्ट ने बैंक को एक मजबूत आधार दिया है। इन पहलों ने बैंक के रेवेन्यू स्ट्रीम्स को बढ़ाया है और कस्टमर एंगेजमेंट को बेहतर बनाया है, जिसके नतीजे अब साफ दिख रहे हैं। 2020 के बड़े पुनर्गठन के बाद से बैंक लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
आगे क्या उम्मीद करें?
शेयरहोल्डर्स के लिए अच्छी खबर यह है कि बैंक की प्रॉफिटेबिलिटी में लगातार सुधार की उम्मीद है। बैंक की डिजिटल कैपेबिलिटी बढ़ने से नए ग्राहक जुड़ेंगे और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बढ़ेगा, जिससे फी इनकम में ग्रोथ जारी रहेगी। रिटेल और MSME सेगमेंट पर फोकस लोन बुक को डाइवर्सिफाई करेगा और कंसंट्रेशन रिस्क को कम करेगा। LIC और SMBC जैसे पार्टनर्स से नए बिजनेस मौके और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ने की उम्मीद है। मजबूत कैपिटल रेश्यो भविष्य की ग्रोथ के लिए एक बढ़िया बफर प्रदान करते हैं।
जोखिम जिन पर रखनी होगी नजर
हालांकि, कुछ जोखिम भी हैं जिन पर नजर रखने की जरूरत है। मई 2025 में RBI ने रेगुलेटरी नॉन-कंप्लायंस के लिए ₹29.6 लाख का जुर्माना लगाया था, जो लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता को बताता है। SEBI ने भी कुछ एग्जीक्यूटिव्स पर इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप लगाए हैं। डिजिटल बैंकिंग स्पेस में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के लिए लगातार निवेश और इनोवेशन की जरूरत होगी। साथ ही, मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितताएं भी एसेट क्वालिटी को प्रभावित कर सकती हैं, जिन पर बैंक को सक्रिय रूप से प्रबंधन करना होगा।