मार्केट में बड़े खिलाड़ियों की तरफ से पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव देखे गए हैं। अमेरिकन वेंचर कैपिटल फर्म Y Combinator ने Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures में अपनी **1.19%** हिस्सेदारी करीब **₹1,435 करोड़** में बेच दी है। वहीं, दिग्गज निवेशक विजय केडिया की Kedia Securities ने Zaggle Prepaid Ocean Services में **1.48%** हिस्सेदारी खरीदी है।
Y Combinator का Groww से एग्जिट (Exit)
US-बेस्ड वेंचर कैपिटल फर्म YC Holdings II, LLC ने 18 अगस्त 2026 को Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures के 7.46 करोड़ शेयर्स, जो कि कुल 1.19% हिस्सेदारी के बराबर हैं, ₹192.16 प्रति शेयर के भाव से बेचे। इस डील का कुल मूल्य लगभग ₹1,435.19 करोड़ रहा। इस खबर के बाद Groww के शेयर्स में गिरावट देखने को मिली और यह BSE पर 2.52% टूटकर ₹193.70 पर बंद हुआ।
बता दें कि यह बिकवाली कंपनी के दमदार नतीजों के तुरंत बाद आई है। जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में Billionbrains Garage Ventures ने 94% की ग्रोथ के साथ ₹735 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, जबकि रेवेन्यू 66% बढ़कर ₹1,501 करोड़ रहा था। हालांकि, Y Combinator जैसी बड़ी फर्म द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचना अक्सर एग्जिट स्ट्रेटेजी का हिस्सा होता है, न कि कंपनी के बिजनेस हेल्थ का संकेत। फिर भी, बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की बिकवाली से शेयर की कीमत पर थोड़े समय के लिए दबाव आ सकता है।
केडिया सिक्योरिटीज की Zaggle में एंट्री
दूसरी ओर, अनुभवी निवेशक विजय केडिया से जुड़ी Kedia Securities ने स्पेंड मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्रोवाइडर Zaggle Prepaid Ocean Services में 20 लाख शेयर्स, यानी 1.48% हिस्सेदारी, ₹164.72 प्रति शेयर के भाव से खरीदी। इस सौदे की कुल वैल्यू करीब ₹32.94 करोड़ रही। इस खबर के चलते Zaggle Prepaid के शेयर्स में तेजी देखी गई और यह NSE पर 3.36% चढ़कर ₹165.88 पर बंद हुआ।
HDFC Mutual Fund ने घटाई Cyient में हिस्सेदारी
इसी तरह, HDFC Mutual Fund ने इंजीनियरिंग फर्म Cyient में अपनी हिस्सेदारी कम की है। म्यूचुअल फंड हाउस ने 5.32 लाख शेयर्स, जो कि 0.5% हिस्सेदारी है, ₹854.01 प्रति शेयर के औसत भाव से ₹45.47 करोड़ में बेचे।
निवेशकों के लिए, ये सभी ट्रांजैक्शंस (Transactions) इंस्टीट्यूशनल और बड़े रिटेल निवेशकों द्वारा पोर्टफोलियो को री-बैलेंस (Re-balance) करने की ओर इशारा करते हैं। हालांकि इंस्टीट्यूशनल बिकवाली से शॉर्ट-टर्म में मार्केट सेंटिमेंट (Market Sentiment) पर असर पड़ सकता है, लेकिन कंपनियों के लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस (Long-term Performance) को इन डील्स से अलग करके देखना जरूरी है। फिनटेक और डिजिटल सॉल्यूशंस सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, साथ ही ओवरऑल मार्केट की वोलेटिलिटी (Volatility) जैसे जोखिमों पर नजर रखनी होगी। शेयरहोल्डर्स (Shareholders) को कंपनियों की अगली तिमाही की परफॉर्मेंस और मैनेजमेंट के कमेंट्री पर ध्यान देना चाहिए, जो बड़े शेयरहोल्डर्स की पीरियडिक ब्लॉक डील्स (Block Deals) की तुलना में कंपनी के भविष्य की दिशा को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर देंगे।
