Winsome Diamonds & Jewellery के पतन के लगभग 14 साल बाद, भगोड़े जतिन मेहता के खिलाफ कानूनी केस 2026 में भी सक्रिय है। भारतीय अधिकारी ₹6,800 करोड़ के बैंक डिफॉल्ट की वसूली का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कंपनी लिक्विडेशन में है, जिससे शेयरधारकों को कोई उम्मीद नहीं है। यह अपडेट नवीनतम अदालती फैसलों और मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति का विवरण देता है।
2026 के नए कानूनी घटनाक्रम
फरवरी 2026 तक, भगोड़े व्यवसायी जतिन मेहता से जुड़ा यह बहुचर्चित कानूनी मामला भारतीय अदालतों में प्रक्रियात्मक अपडेट्स के साथ आगे बढ़ रहा है। 2012 में ज्वैलरी निर्यातक Winsome Diamonds & Jewellery Ltd के ढहने से उपजा यह केस, सीमा पार वित्तीय वसूली की चुनौतियों का एक बड़ा उदाहरण बना हुआ है।
अदालतों का रुख
2026 की शुरुआत में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने जतिन मेहता की एक याचिका खारिज कर दी। उन्होंने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (Fugitive Economic Offenders Act) को चुनौती दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक वह भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र में आत्मसमर्पण नहीं करते, तब तक वे ऐसी याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे। जतिन मेहता अभी भी विदेश में हैं।
इसके अलावा, अप्रैल 2026 में, मुंबई की एक विशेष सीबीआई (CBI) अदालत ने धोखाधड़ी के मामलों को संभालने की प्रक्रिया में बदलाव किया। अदालत ने माना कि मामले में शामिल लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं है, और कुछ मामलों को मजिस्ट्रेट अदालत में स्थानांतरित कर दिया। इसका मतलब है कि अब कानूनी ध्यान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के बजाय भारतीय दंड संहिता के तहत अपराधों पर केंद्रित है। इस बीच, अधिकारी उनके परिवार के सदस्यों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।
वित्तीय संकट की जड़ें
यह मामला 2012 का है, जब एक समय भारतीय हीरा उद्योग का प्रमुख खिलाड़ी रही Winsome Diamonds अचानक ढह गई। सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी ने बैंकों के एक कंसोर्टियम से लिए गए भारी-भरकम लोन पर डिफॉल्ट किया, जिसमें पंजाब नेशनल बैंक प्रमुख ऋणदाताओं में से एक था।
कंपनी की कार्यप्रणाली में भारतीय बैंकों द्वारा जारी स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (SBLCs) का उपयोग करके अंतरराष्ट्रीय बुलियन आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान की गारंटी देना शामिल था। Winsome सोने का आयात करती थी, उसे गहनों में परिवर्तित करती थी, और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में संस्थाओं को निर्यात करती थी। जब UAE-आधारित आयातकों ने Winsome को भुगतान नहीं किया, तो कंपनी बैंकों के प्रति अपनी देनदारियों पर डिफॉल्ट कर गई, जिससे ऋणदाताओं को गारंटी का भुगतान करना पड़ा। भारतीय बैंकों के प्रति कुल डिफॉल्ट देनदारियां ₹6,800 करोड़ से अधिक थीं।
शेयरधारकों के लिए वर्तमान हकीकत
निवेशकों और लेनदारों के लिए, व्यावसायिक संचालन के मामले में स्थिति बहुत पहले ही समाप्त हो चुकी है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) अहमदाबाद बेंच ने कंपनी के लिए लिक्विडेशन ( परिसमापन) का आदेश दिया है। चूंकि Winsome Diamonds अब बंद हो चुकी है और लिक्विडेशन के अधीन है, इसलिए कोई भी मौजूदा व्यावसायिक गतिविधि नहीं है।
जतिन मेहता के सेंट किट्स और नेविस में निवास करने के कारण, जहां भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं है, बैंकों और लिक्विडेटर्स द्वारा विश्व स्तर पर संपत्ति की वसूली के कानूनी प्रयास धीमे और जटिल बने हुए हैं। शेयरधारकों के लिए, कंपनी की डीलिस्टिंग स्थिति और लिक्विडेशन प्रक्रिया की प्रकृति का मतलब है कि स्टॉक में प्रभावी रूप से कोई वित्तीय सहायता या मूल्य नहीं बचा है। 2026 के ये अदालती अपडेट उच्च-प्रोफ़ाइल आर्थिक भगोड़ों से निपटने में भारतीय कानूनी प्रणाली की प्रक्रियात्मक बाधाओं की याद दिलाते हैं।
