FD इंश्योरेंस का सच: कहीं आपकी ₹10 लाख की FD पूरी सुरक्षित तो नहीं? ये नियम जानना है जरूरी

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AuthorAditya Rao|Published at:
FD इंश्योरेंस का सच: कहीं आपकी ₹10 लाख की FD पूरी सुरक्षित तो नहीं? ये नियम जानना है जरूरी

अक्सर निवेशक यह सोचते हैं कि एक ही बैंक में अलग-अलग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने से उन्हें ज्यादा इंश्योरेंस कवर मिलेगा। लेकिन सच यह है कि Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (DICGC) के तहत एक बैंक में हर डिपॉजिटर को अधिकतम **₹5 लाख** तक का ही कवर मिलता है, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं।

बहुत से लोग सुरक्षा के चक्कर में अपना बड़ा निवेश एक ही बैंक की कई अलग-अलग FD में बांट देते हैं। उन्हें लगता है कि हर FD पर उन्हें अलग सुरक्षा मिलेगी, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। DICGC के नियमों के मुताबिक, सुरक्षा का दायरा प्रति बैंक, प्रति व्यक्ति अधिकतम ₹5 लाख तक ही सीमित है।

कैसे काम करती है ₹5 लाख की लिमिट?

यह ₹5 लाख की सीमा आपके सभी अकाउंट्स का कुल जोड़ है। इसमें आपका सेविंग अकाउंट, करंट अकाउंट, रिकरिंग डिपॉजिट और FD सब शामिल हैं। अगर आपने एक ही बैंक में ₹10 लाख की FD करा रखी है, तो बैंक डूबने की स्थिति में आपको केवल ₹5 लाख ही सुरक्षित मिलेंगे। बाकी के ₹5 लाख की रिकवरी बैंक की बची हुई संपत्तियों पर निर्भर करेगी।

ब्याज (Interest) का गणित

याद रखें, यह ₹5 लाख की लिमिट सिर्फ प्रिंसिपल अमाउंट तक सीमित नहीं है, इसमें जमा पर मिलने वाला ब्याज भी जुड़ता है। अगर आपका कुल बैलेंस (प्रिंसिपल + ब्याज) ₹5 लाख से ऊपर जाता है, तो अतिरिक्त राशि पर कोई इंश्योरेंस कवर नहीं मिलता।

डायवर्सिफिकेशन ही एक रास्ता

अपनी सुरक्षा का दायरा बढ़ाने का एकमात्र तरीका है कि आप अपना पैसा अलग-अलग बैंकों में रखें। अगर आप Bank A में ₹5 लाख और Bank B में ₹5 लाख रखते हैं, तो आपका पूरा ₹10 लाख सुरक्षित रहेगा, क्योंकि दोनों अलग-अलग कानूनी संस्थाएं (Legal Entities) हैं। ध्यान रखें कि एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं (Branches) में पैसा रखने से इंश्योरेंस कवर नहीं बढ़ता।

NBFCs से रहें सावधान

DICGC की यह सुरक्षा सिर्फ कमर्शियल और कोऑपरेटिव बैंकों पर लागू होती है। अगर आप ज्यादा ब्याज के लालच में Non-Banking Financial Companies (NBFCs) में पैसा जमा करते हैं, तो वहां बैंक जैसा कोई इंश्योरेंस कवर नहीं मिलता। इसलिए, बड़ी रकम निवेश करने से पहले बैंक की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी को जरूर परखें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.