अमीरों का प्राइवेट क्रेडिट में दांव बढ़ा: AIF में ₹12.74 लाख करोड़ से ज्यादा की प्रतिबद्धता

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
अमीरों का प्राइवेट क्रेडिट में दांव बढ़ा: AIF में ₹12.74 लाख करोड़ से ज्यादा की प्रतिबद्धता

अमीर निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए प्राइवेट क्रेडिट की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। मार्च 2026 तक SEBI-पंजीकृत कैटेगरी II AIF की प्रतिबद्धताएं ₹12.74 लाख करोड़ तक पहुंच गईं। हालांकि यह संपत्ति क्लास पारंपरिक बॉन्ड की तुलना में अधिक यील्ड (Yield) प्रदान करती है, निवेशकों को संभावित रिटर्न के मुकाबले लिक्विडिटी (Liquidity) की कमी और क्रेडिट जोखिमों का भी ध्यान रखना होगा।

क्या हुआ?

भारत के अमीर निवेशक और फैमिली ऑफिस (Family Offices) अब अपनी निवेश रणनीति बदल रहे हैं और प्राइवेट क्रेडिट को अपने पोर्टफोलियो का एक स्थायी हिस्सा बना रहे हैं। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि SEBI-विनियमित कैटेगरी II अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) - जो प्राइवेट लेंडिंग के मुख्य जरिया हैं - में मार्च 2026 तक ₹12.74 लाख करोड़ की प्रतिबद्धताएं दर्ज की गईं। यह एक बड़ी राशि है, जो पूरे AIF उद्योग में कुल ₹16.94 लाख करोड़ की प्रतिबद्धता का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा है। यह रुझान दर्शाता है कि प्राइवेट डेट अब सिर्फ एक प्रायोगिक निवेश नहीं, बल्कि अमीर निवेशकों के पोर्टफोलियो का एक मुख्य हिस्सा बन गया है।

निवेशक प्राइवेट क्रेडिट क्यों चुन रहे हैं?

निवेशक ऐसी संपत्तियां (Assets) ढूंढ रहे हैं जो स्थिर आय (Stable Income) और विविधीकरण (Diversification) प्रदान कर सकें, खासकर जब इक्विटी मार्केट में अस्थिरता का दौर आता है। कई फैमिली ऑफिस अब अपने कुल पोर्टफोलियो का 5% से 15% तक प्राइवेट क्रेडिट में निवेश कर रहे हैं। यह मांग इसलिए बढ़ी है क्योंकि पारंपरिक बैंकों को अक्सर नियामक बाधाओं (Regulatory Constraints) का सामना करना पड़ता है, जिससे वे कुछ खास तरह की हाई-रिस्क परियोजनाओं, अधिग्रहणों या प्रमोटर-नेतृत्व वाली गतिविधियों को लोन देने में सीमित हो जाते हैं। प्राइवेट क्रेडिट फंड एक पुल का काम करते हैं, जहां पारंपरिक बैंक फाइनेंसिंग नहीं कर पाते, वहां वे पैसा मुहैया कराते हैं। इससे निवेशकों को ऐसे रिटर्न कमाने का मौका मिलता है जो अक्सर पब्लिक बॉन्ड मार्केट की तुलना में अधिक होते हैं।

यील्ड (Yield) और स्ट्रैटेजी मिक्स

प्राइवेट क्रेडिट फंड लोन के जोखिम प्रोफाइल के आधार पर रिटर्न के अलग-अलग स्तर प्रदान करते हैं। इंडस्ट्री में ग्रॉस यील्ड (Gross Yield) वर्तमान में 14% से 22% तक है। परफॉर्मिंग क्रेडिट (Performing Credit), जिसमें स्थिर, कैश-जेनरेट करने वाली कंपनियों को लोन देना शामिल है, आम तौर पर 14% से 18% के बीच यील्ड प्रदान करता है। जिन निवेशकों का जोखिम सहन करने की क्षमता अधिक है, उनके लिए जटिल या विशेष स्थितियों से जुड़े फंड 18% से 22% तक यील्ड दे सकते हैं। ये रिटर्न निवेशक को उन जोखिमों के लिए मुआवजा देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं जो बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposits) या सरकारी सिक्योरिटीज (Government Securities) में मौजूद नहीं होते।

निवेशकों को जिन जोखिमों पर विचार करना चाहिए

हालांकि यील्ड आकर्षक लगती है, प्राइवेट क्रेडिट एक जोखिम-मुक्त निवेश नहीं है। एक मुख्य चिंता लिक्विडिटी (Liquidity) की है; स्टॉक या बॉन्ड के विपरीत, जो एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं, ये निवेश अतरल (Illiquid) होते हैं। अगर निवेशकों को अचानक नकदी की जरूरत पड़ती है, तो वे अक्सर जल्दी से अपनी पोजीशन से बाहर नहीं निकल पाते। क्रेडिट डिफॉल्ट (Credit Default) का भी अंतर्निहित जोखिम है, जहां उधार लेने वाली कंपनी लोन की मूल राशि या ब्याज चुकाने में विफल रहती है। इसके अलावा, प्राइवेट क्रेडिट संपत्तियों को स्टॉक की तरह हर दिन मार्क-टू-मार्केट (Mark-to-Market) नहीं किया जाता है, जिसका मतलब है कि जब तक कोई भुगतान चूक नहीं जाता, तब तक निवेश का वास्तविक मूल्य पूरी तरह से दिखाई नहीं दे सकता है। निवेशकों को यह भी पता होना चाहिए कि रेगुलेटर, SEBI, ने AIFs के आसपास नियमों को कड़ा किया है ताकि संपत्तियों का बेहतर मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके और अत्यधिक जोखिम एकाग्रता (Risk Concentration) को रोका जा सके, जो वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है।

निवेशकों को आगे क्या ट्रैक करना चाहिए?

इस क्षेत्र में निवेश करने वाले या विचार करने वाले लोगों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण कारक लोन को अंडरराइट (Underwrite) करने में मैनेजर की क्षमता है। निवेशकों को लोन को सुरक्षित करने वाले कोलैटरल (Collateral) की गुणवत्ता और डेट की वरिष्ठता (Seniority of Debt) का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए, जो यह निर्धारित करता है कि उधारकर्ता डिफॉल्ट होने पर किसे पहले भुगतान किया जाएगा। फंड मैनेजर के ऐतिहासिक ट्रैक रिकॉर्ड और पिछले निवेशों से सफलतापूर्वक बाहर निकलने की उनकी क्षमता की निगरानी करना इस संपत्ति वर्ग में सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बना रहेगा।

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