भारत के अमीर निवेशक अब पुराने वित्तीय तरीकों को छोड़कर फ्लेक्सिबल अप्रोच अपना रहे हैं। HSBC की ताजा सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, **89%** हाई-नेट-वर्थ निवेशक अब डायनामिक वेल्थ मैनेजमेंट चाहते हैं, क्योंकि रिटायरमेंट का लक्ष्य **$4,20,000** तक पहुंच गया है, जबकि बचत अभी लक्ष्य के **48%** से भी कम है।
प्लानिंग में आया बड़ा बदलाव
भारत के अमीर वर्ग के बीच अब पुरानी और लकीर की फकीर वाली फाइनेंशियल प्लानिंग का दौर खत्म हो रहा है। जैसे-जैसे लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ रही है और करियर के रास्ते बदल रहे हैं, वेल्थ मैनेजमेंट एक जटिल काम बन गया है। HSBC का डेटा बताता है कि पुराने रिटायरमेंट मॉडल अब उस पीढ़ी के लिए कारगर नहीं हैं, जो एक साथ माता-पिता की देखभाल, बच्चों की जिम्मेदारी और मिड-करियर बदलावों के दबाव में है। अब निवेशक ऐसी स्ट्रेटेजी चाहते हैं जो बिना लॉन्ग-टर्म ग्रोथ से समझौता किए लिक्विडिटी (Liquidity) भी सुनिश्चित करे।
बचत में बढ़ती खाई
इच्छा और वास्तविकता के बीच का अंतर फाइनेंशियल एडवाइजर्स के लिए चिंता का विषय है। अमीर भारतीयों का मानना है कि रिटायरमेंट के लिए $4,20,000 की पूंजी जरूरी है, जो पिछले अनुमानों से 6% अधिक है। हालांकि, मौजूदा बचत लक्ष्य के केवल 48% तक ही सीमित है। इस कमी के चलते निवेशकों का व्यवहार बदल रहा है। अब 75% से ज्यादा निवेशक रिटायरमेंट को 'काम का अंत' नहीं, बल्कि एक 'धीरे-धीरे होने वाला बदलाव' मानते हैं। 'एनकोर करियर' (Encore Careers) का चलन बढ़ रहा है, जहाँ 34% लोग रिटायरमेंट की पारंपरिक उम्र के बाद भी प्रोफेशनल रूप से सक्रिय रहना चाहते हैं।
अगली पीढ़ी के लिए बदलती विरासत
वेल्थ ट्रांसफर का नजरिया भी पूरी तरह बदल चुका है। जहां पुरानी पीढ़ी मकान और सुरक्षित संपत्ति देने पर जोर देती थी, वहीं Gen Z और मिलेनियल्स के लिए विरासत का मतलब व्यक्तिगत लक्ष्यों, जैसे ट्रैवल और स्टार्टअप्स को पूरा करना है। इस अंतर के कारण परिवारों ने अपनी रणनीति बदली है। अब महज पैसा ट्रांसफर करने के बजाय, 87% निवेशक वित्तीय साक्षरता और टेक्निकल स्किल्स ट्रांसफर करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। मकसद अगली पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाना है, न कि उन्हें केवल स्थिर संपत्ति का वारिस छोड़ना।
