Indian Fintech में बहार! FY25 में पहली बार हुआ मुनाफा, Wealthtech ने मारी बाज़ी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Fintech में बहार! FY25 में पहली बार हुआ मुनाफा, Wealthtech ने मारी बाज़ी

भारतीय फिनटेक (Fintech) सेक्टर के लिए यह एक ऐतिहासिक पल है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में इस सेक्टर ने पहली बार कुल मिलाकर मुनाफा दर्ज किया है। जेफ़रीज़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कमाल वेल्थटेक (Wealthtech) प्लेटफॉर्म्स की वजह से हुआ है, जिन्होंने **₹7,400 करोड़** का तगड़ा प्रॉफिट कमाया है। हालांकि, पेमेंट सेक्टर (Payments Segment) अभी भी रेवेन्यू में आगे है, लेकिन घाटे में चल रहा है।

वेल्थटेक चमका, पेमेंट सेक्टर फिसड्डी

रिपोर्ट्स के अनुसार, FY25 में भारतीय फिनटेक इंडस्ट्री ने कुल ₹1.03 लाख करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया। इसमें पेमेंट सेक्टर का योगदान ₹51,200 करोड़ रहा, लेकिन अंत में ₹5,300 करोड़ के कंसोलिडेटेड घाटे के साथ बंद हुआ। वहीं, वेल्थटेक सेगमेंट ने ₹22,600 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया और ₹7,400 करोड़ का आफ्टर-टैक्स प्रॉफिट दिया। यह दिखाता है कि कैसे ज़्यादा वॉल्यूम वाले पेमेंट बिज़नेस अपने बड़े कस्टमर बेस का मॉनेटाइजेशन करने के लिए स्ट्रगल कर रहे हैं, जबकि वेल्थ-फोकस्ड कंपनियों की कमाई ज़ोरों पर है।

Groww, Zerodha और Angel One जैसी कंपनियों ने भारतीय कैपिटल मार्केट्स में रिटेल इन्वेस्टर्स की बढ़ती भागीदारी का खूब फायदा उठाया है। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में लगातार इनफ्लो और शेयर बाज़ार में एक्टिव ट्रेडिंग ने इस ग्रोथ को सहारा दिया है। ये फर्म्स मुख्य रूप से ब्रोकरेज फीस, डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन और फ्यूचर्स व ऑप्शंस ट्रेडिंग से कमाई करती हैं।

भविष्य की ग्रोथ और रेगुलेटरी चुनौतियाँ

अगले पांच सालों में फिनटेक इंडस्ट्री का रेवेन्यू ग्रोथ रेट घटकर 18% रहने का अनुमान है, जो FY21 से FY25 के बीच देखे गए 49% कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से काफी कम है। इस धीमी ग्रोथ का एक बड़ा कारण रेगुलेटरी बदलाव हैं, जैसे कि कुछ UPI इंसेंटिव स्कीम्स का हटना और डिजिटल पेमेंट प्रैक्टिसेस पर सख्त निगरानी। वेल्थटेक फर्म्स के लिए, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) द्वारा इंडेक्स ऑप्शंस डेरिवेटिव्स को लेकर लाए जा सकने वाले नए नियम ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और क्लाइंट फ्लो से होने वाली आय को प्रभावित कर सकते हैं।

लॉन्ग-टर्म ग्रोथ बनाए रखने के लिए, वेल्थटेक कंपनियां अब फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की क्रॉस-सेलिंग पर ज़्यादा फोकस कर रही हैं। मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी, सिक्योरिटीज के बदले लोन और पर्सनल लोन जैसे ऑफर्स देकर, ये कंपनियां सिंपल ब्रोकरेज फीस से आगे बढ़कर कस्टमर्स का लाइफटाइम वैल्यू बढ़ाने का लक्ष्य रख रही हैं। जेफ़रीज़ को उम्मीद है कि अगर ये फर्म्स रेगुलेटरी ज़रूरतों को सफलतापूर्वक मैनेज करती हैं और यूज़र एंगेजमेंट बनाए रखती हैं, तो FY28 तक वेल्थटेक रेवेन्यू 29% CAGR की दर से बढ़ेगा।

इन्वेस्टर्स को यह देखना होगा कि अलग-अलग कंपनियां रेगुलेटरी मानकों पर कैसे खरा उतरती हैं, खासकर डेरिवेटिव ट्रेडिंग और लेंडिंग नॉर्म्स के मामले में। अपनी प्रोडक्ट रेंज को डाइवर्सिफाई करते हुए प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की इन फर्म्स की क्षमता आने वाले सालों में सेक्टर की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

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