Wealth First Portfolio Managers Ltd ने सितंबर तिमाही (Q3 FY26) के अपने नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी का परफॉरमेंस मिला-जुला रहा। कंसोलिडेटेड आधार पर, कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में 19.28% की जोरदार ग्रोथ दिखी और यह Rs. 1,791.40 Cr पर पहुंच गया। लेकिन, बॉटम लाइन यानी नेट प्रॉफिट पर बड़ा झटका लगा। कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान तिमाही के Rs. 1,106.77 Cr के मुकाबले 93.06% लुढ़क कर सिर्फ Rs. 76.77 Cr रह गया।
हालांकि, अगर सिर्फ कंपनी के अपने ऑपरेशन्स (स्टैंडअलोन) की बात करें, तो Q3 FY26 में रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में 2.47% की मामूली बढ़ोतरी के साथ Rs. 1,531.90 Cr रहा। लेकिन, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 84.4% की भारी गिरावट के साथ Rs. 138.49 Cr पर आ गया।
यह तिमाही तस्वीर थोड़ी धुंधली है, क्योंकि पिछले 9 महीनों (9-month period ended December 31, 2025) के नतीजों में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2,414% की शानदार छलांग लगाकर Rs. 2,814.43 Cr पर पहुंच गया। वहीं, 9 महीनों में स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 30.1% घटकर Rs. 2,652.79 Cr रहा।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सेल्स बढ़ने के बावजूद Q3 में नेट प्रॉफिट में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई। यह मार्जिन में भारी दबाव (Margin Compression), ऑपरेटिंग कॉस्ट्स (Operating Costs) या इंटरेस्ट एक्सपेंसेस (Interest Expenses) के बढ़ने का संकेत हो सकता है। दूसरी संभावना यह भी है कि पिछले साल की Q3 में कोई बड़ा नॉन-रेकरिंग फायदा (One-off Gain) हुआ हो, जिसने उस तिमाही के प्रॉफिट को कृत्रिम रूप से बढ़ाया हो। कंपनी, जो ब्रोकिंग और म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन जैसे काम करती है, ने इन नतीजों को लेकर कोई खास स्पष्टीकरण या सेगमेंट-वाइज परफॉरमेंस की जानकारी नहीं दी है। M/s Jaimin Deliwala & Co. जैसे ऑडिटर से लिमिटेड रिव्यू (Limited Review) हुआ है, पर फुल ऑडिट (Full Audit) नहीं।
बाजार की इस वोलेटाइल परफॉरमेंस के बीच, कंपनी ने शेयरहोल्डर्स को खुश करने के लिए फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए तीसरा अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) घोषित किया है। डिविडेंड 40% यानी Rs. 4.00 प्रति इक्विटी शेयर के हिसाब से दिया जाएगा, जिसकी रिकॉर्ड डेट February 10, 2026 तय की गई है।
इन नतीजों के बाद, सबसे बड़ा जोखिम यही है कि Q3 में प्रॉफिट में आई इतनी बड़ी गिरावट की असली वजह क्या है, और क्या यह ट्रेंड जारी रहेगा। निवेशकों की नजर मैनेजमेंट के एक्सप्लेनेशन (Explanation) पर रहेगी, खासकर इस बात पर कि कंपनी अपने मार्जिन को कैसे बेहतर बनाएगी और कॉस्ट को कैसे कंट्रोल करेगी।
