इन्वेस्टिंग की दुनिया के दिग्गज Warren Buffett ने **61 साल** के लंबे सफर के बाद Berkshire Hathaway के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। अब निवेशकों की नजरें कंपनी के उत्तराधिकार (succession plan) और Greg Abel के नेतृत्व पर टिकी हैं।
61 साल का स्वर्णिम सफर
इन्वेस्टिंग की दुनिया के सबसे बड़े नाम, 96 वर्षीय Warren Buffett ने आधिकारिक तौर पर Berkshire Hathaway के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। यह एक ऐसे दौर का अंत है जिसकी शुरुआत 1965 में हुई थी, जब बफेट ने एक संघर्षरत टेक्सटाइल मिल का नियंत्रण लेकर उसे दुनिया की सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट पावरहाउस में बदल दिया था। उनका 61 साल का कार्यकाल न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि इसने भारतीय शेयर बाजार समेत दुनिया भर के निवेशकों के सोचने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया।
उत्तराधिकार और भविष्य की रणनीति
कंपनी ने काफी समय पहले ही एक स्पष्ट 'सक्सेशन प्लान' तैयार कर लिया था। अब Greg Abel, जो पहले वाइस चेयरमैन के रूप में नॉन-इंश्योरेंस ऑपरेशंस संभाल रहे थे, कंपनी के भावी कामकाज की कमान संभालेंगे। वहीं, Ajit Jain के नेतृत्व में इंश्योरेंस बिजनेस का संचालन पहले की तरह जारी रहेगा, जिससे शेयरहोल्डर्स को निरंतरता का भरोसा मिलता है।
डिसेंट्रलाइज्ड मॉडल और भविष्य की चुनौती
Berkshire Hathaway की खासियत इसका 'डिसेंट्रलाइज्ड बिजनेस मॉडल' रहा है। बफेट ने हमेशा मजबूत कंपनियों को खरीदकर उनकी मैनेजमेंट टीम को पूरी आजादी देने की नीति अपनाई। ओमाहा स्थित हेडक्वार्टर का मुख्य काम केवल 'कैपिटल एलोकेशन' यानी पैसा कहां निवेश करना है, उस पर फोकस करना रहा है। अब बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि क्या नई लीडरशिप भी इसी संस्कृति को कायम रख पाती है।
भारतीय निवेशकों के लिए सीख
भारतीय 'वैल्यू इन्वेस्टर्स' के लिए बफेट का 'मार्जिन ऑफ सेफ्टी' और उनके वार्षिक पत्र हमेशा से एक गाइड रहे हैं। यह बदलाव किसी भी बड़ी कंपनी के लिए 'सक्सेशन रिस्क' का एक बड़ा केस स्टडी है। निवेशक अब यह ट्रैक कर रहे हैं कि क्या नेतृत्व परिवर्तन के बाद डिविडेंड पॉलिसी या बायबैक स्ट्रैटेजी में कोई बदलाव आता है।
