Visa और Mastercard का Stablecoin प्लान: पेमेंट नेटवर्क में छिड़ेगी नई जंग?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Visa और Mastercard का Stablecoin प्लान: पेमेंट नेटवर्क में छिड़ेगी नई जंग?
Overview

Visa, Mastercard और Stripe मिलकर एक ऐसा Stablecoin सेटलमेंट सिस्टम बना रहे हैं जो सीधे पारंपरिक बैंकों को बायपास करेगा। ये कंपनियां पेमेंट फ्लो को अपने कंट्रोल में लेकर बैंकों को किनारे करने की तैयारी में हैं, और क्रिप्टो-एसेट की दुनिया से ट्रांजैक्शन फीस से कमाई बढ़ाने का दांव खेल रही हैं।

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प्रोग्रामेबल सेटलमेंट की ओर बढ़ते कदम

पेमेंट की दुनिया में बड़े बदलाव की आहट है! Visa और Mastercard जैसी दिग्गज कंपनियां, Stripe के साथ मिलकर Stablecoin सेटलमेंट को बड़े पैमाने पर अपनाने की तैयारी कर रही हैं। इसका सीधा मतलब है कि अब पैसा ट्रांसफर करने के तरीके में बड़ा फेरबदल होगा। ये कंपनियां अपने खुद के सिस्टम से Stablecoin ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करेंगी, जिससे पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम की जरूरत कम हो जाएगी। ये एक तरह से अपनी पुरानी ताकत को बनाए रखने की कोशिश है, ताकि डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFi) के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके। इस कदम से ये कंपनियां सिर्फ पेमेंट कराने वाली नहीं, बल्कि वैल्यू ट्रांसफर के लिए मुख्य लेजर बन जाएंगी।

मार्केट में कॉम्पिटिशन और नई रणनीति

ये कोई छोटे-मोटे डिजिटल करेंसी एक्सपेरिमेंट नहीं हैं। Visa और Mastercard का फोकस सीधे ट्रांजैक्शन की स्पीड और वॉल्यूम पर है, न कि क्रिप्टो की अस्थिरता पर। Mastercard ने हाल ही में Bridge को $1.1 बिलियन में खरीदा है, जो दिखाता है कि वे अपने बिजनेस को और मजबूत करना चाहते हैं। जहां PayPal जैसी कंपनियां अपने खुद के Stablecoin बना रही हैं, वहीं Visa-Mastercard का प्लान एक ऐसा स्टैंडर्ड बनाना है जो अलग-अलग ब्लॉकचेन पर काम कर सके। यह Tether (USDT) जैसी कंपनियों के लिए सीधी चुनौती है, जो अभी मार्केट में राज कर रही हैं लेकिन जिनके पास बड़े फाइनेंशियल संस्थानों के लिए जरूरी रेगुलेटरी कंप्लायंस की कमी है। रेगुलेटेड सेटलमेंट पर जोर देकर, ये कंपनियां बड़े निवेशकों को अपनी ओर खींचना चाहती हैं, जो DeFi की बिखरी हुई दुनिया से दूर रहना चाहते हैं।

आने वाली मुश्किलें और चिंताएं

हालांकि, इस नई पहल में कई खतरे भी छिपे हैं। Stablecoin को लेकर रेगुलेटरी माहौल अभी भी अनिश्चित है। अगर सरकारें Stablecoin के रिजर्व की पारदर्शिता पर कोई कड़ा कदम उठाती हैं, तो इन टोकन की पूरी उपयोगिता पर सवाल उठ सकता है। इसके अलावा, Coinbase जैसी कंपनियों की संभावित भागीदारी भी एक बड़ी चिंता है। अगर सबसे बड़ा अमेरिकी एक्सचेंज (exchange) एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा बनता है जिसे पुरानी पेमेंट कंपनियां कंट्रोल करती हैं, तो यह उन डीसेंट्रलाइज्ड कम्युनिटी को नाराज कर सकता है जिनकी वजह से यह प्लेटफॉर्म शुरू हुआ था। अगर रेगुलेटर इन Stablecoin अरेंजमेंट्स को सिक्योरिटी मानते हैं, तो पूरा सिस्टम तुरंत बड़ी मुश्किल में पड़ सकता है। USDC पर निर्भरता का मतलब है कि ये कंपनियां सीधे तौर पर इश्यूअर की सॉल्वेंसी (solvency) पर निर्भर होंगी, जो पारंपरिक फिएट सेटलमेंट में नहीं होता।

भविष्य का रास्ता और कमाई का अनुमान

जानकार अभी भी इस बात पर बंटे हुए हैं कि इस कदम से सीधे कमाई बढ़ेगी या सिर्फ ऑपरेशनल खर्चे बढ़ेंगे। Visa और Mastercard का मुख्य मकसद शायद यही है कि अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करना, प्राइवेट ब्लॉकचेन सॉल्यूशंस बनाने से सस्ता हो। जैसे-जैसे इंडस्ट्री कंसॉलिडेशन (consolidation) की ओर बढ़ रही है, ये पेमेंट कंपनियां खुद को अगली पीढ़ी के फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर के गेटकीपर के रूप में पोजिशन कर रही हैं। वे ब्लॉकचेन को एक कमोडिटी की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं, और ट्रांजैक्शन फीस का बड़ा हिस्सा खुद अपने पास रखना चाहते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.