भारतीय डिजिटल पेमेंट मार्केट में UPI के दबदबे के बीच Visa ने अपनी रणनीति बदल दी है। कंपनी अब रिटेल पेमेंट से हटकर हाई-स्पेंडिंग ग्राहकों और B2B बिजनेस पर दांव लगा रही है।
भारत के पेमेंट सेक्टर में UPI का बोलबाला है। छोटे-मोटे खर्चों से लेकर ग्रॉसरी तक UPI का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। इस माहौल में पेमेंट दिग्गज Visa ने अब अपनी रणनीति को पूरी तरह से बदल लिया है। कंपनी अब कम मार्जिन वाले रिटेल ट्रांजैक्शंस से अपना ध्यान हटाकर हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स और B2B सेक्टर की ओर शिफ्ट कर रही है। यह कदम रेगुलेटरी दबाव और इंटरचेंज फीस पर लगी कैप्स से होने वाले नुकसान की भरपाई करने के लिए उठाया गया है।
प्रीमियम क्रेडिट कार्ड्स पर जोर
Visa ने अपने प्रीमियम पोर्टफोलियो, जैसे कि 'Infinite Privilege' और 'Infinite Reserve' को प्रमोट करना शुरू कर दिया है। इनका लक्ष्य उन ट्रांजैक्शंस को कैप्चर करना है जहाँ हाई स्पेंडिंग और ग्लोबल एक्सेप्टेंस की जरूरत होती है। ये प्रीमियम सेगमेंट फिलहाल लोकल पेमेंट सिस्टम्स की पहुंच से थोड़े दूर हैं, जिससे कंपनी को एक स्टेबल और हाई-फी रेवेन्यू मिल रहा है।
B2B और कंसल्टिंग सर्विसेज में विस्तार
सिर्फ कार्ड्स ही नहीं, Visa अब बैंकों के लिए एक टेक्निकल पार्टनर के तौर पर उभर रही है। कंपनी डेटा कंसल्टिंग और AI-बेस्ड साइबर-सिक्योरिटी टूल्स जैसी वैल्यू-एडेड सर्विसेज ऑफर कर रही है। इससे कंपनी का रेवेन्यू अब सिर्फ ट्रांजैक्शन फीस पर निर्भर न रहकर, रिकरिंग सर्विस मॉडल की तरफ बढ़ रहा है।
चुनौतियां अभी बाकी हैं
हालांकि यह रणनीति ठोस है, लेकिन राह आसान नहीं है। घरेलू पेमेंट नेटवर्क जैसे RuPay ने 'क्रेडिट ऑन UPI' के जरिए मार्केट में तगड़ी सेंधमारी की है। यह देखना दिलचस्प होगा कि Visa अपने प्रीमियम सेगमेंट को UPI की बढ़ती पहुंच और कंपटीशन के बीच कैसे बचा पाती है। आने वाले क्वार्टर्स में B2B पेमेंट स्पेस में कंपनी की पकड़ और रेगुलेटरी अपडेट्स ही इसके मार्जिन प्रोफाइल को तय करेंगे।
