Visa ने अपने मिडिल ईस्ट ऑपरेशन्स को दो हिस्सों में बांटने का बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत अब Dubai और Riyadh इसके मुख्य केंद्र होंगे। यह कदम सऊदी अरब की 'रीजनल हेडक्वार्टर' पॉलिसी का सीधा नतीजा है, जो उसके Vision 2030 का एक अहम हिस्सा है। यह पॉलिसी पूरे गल्फ रीजन में कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी को बदल रही है।
पहले कई मल्टीनेशनल कंपनियाँ Dubai को अपना प्राइमरी रीजनल बेस मानती थीं, लेकिन सऊदी अरब के 2024 के नियम ने उन्हें अपने ऑपरेशनल फुटप्रिंट पर फिर से विचार करने पर मजबूर कर दिया है।
Visa के नए स्ट्रक्चर के तहत, मिडिल ईस्ट की सारी एक्टिविटीज़ अब दो सेंटर्स से मैनेज होंगी। Dubai ऑफिस UAE, कुवैत और कतर को देखेगा। वहीं, Riyadh में एक नया और मजबूत ऑफिस सऊदी अरब, बहरीन और ओमान के ऑपरेशन्स को संभालेगा।
यह 'बायफरकेटेड' (Bifurcated) तरीका रियाद के बढ़ते महत्व को दर्शाता है और सऊदी अरब की उस कोशिश का भी हिस्सा है, जिसके तहत वो विदेशी कंपनियों को अपने यहाँ रीजनल HQ स्थापित करने के लिए लुभा रहा है। इस स्ट्रैटेजी से Visa Dubai में अपनी पुरानी मौजूदगी बनाए रखते हुए सऊदी के रेगुलेटरी नियमों का पालन कर पाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पॉलिसी के लागू होने के बाद से 700 से ज़्यादा मल्टीनेशनल कंपनियाँ सऊदी में अपने रीजनल HQ बना चुकी हैं।
किंगडम की रीजनल हेडक्वार्टरिंग पॉलिसी Vision 2030 का एक अहम हिस्सा है, जिसका मकसद तेल पर निर्भर इकोनॉमी को डाइवर्सिफाई करके एक ग्लोबल बिज़नेस हब बनाना है। सऊदी अरब रेगुलेटरी इंसेंटिव्स और मैंडेट्स के ज़रिए फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर रहा है।
इस आक्रामक स्ट्रेटेजी ने खासकर UAE के साथ कड़ा कॉम्पिटिशन खड़ा कर दिया है। 2024 में, सऊदी अरब ने रीजनल हेडक्वार्टर प्रोजेक्ट्स के लिए फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में भारी उछाल देखा, जबकि UAE में इसमें गिरावट आई। BNY Mellon, Goldman Sachs, और Citigroup जैसी ग्लोबल फाइनेंशियल फर्म्स पहले ही रियाद में अपने सीनियर रीजनल HQ स्थापित कर चुकी हैं या करने की योजना बना रही हैं।
Visa का यह कदम गल्फ रीजन में काम कर रही कंपनियों और इन्वेस्टर्स के लिए कुछ अहम ट्रेंड्स को रेखांकित करता है: सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने के लिए रेगुलेटरी एडैप्टेबिलिटी (Regulatory Adaptability) की ज़रूरत, मार्केट एक्सेस और कंप्लायंस (Compliance) को बैलेंस करने के लिए डुअल-हब रीजनल प्रेज़ेंस (Dual-hub Regional Presence) का बढ़ता चलन, और Dubai के साथ-साथ Riyadh का एक महत्वपूर्ण हेडक्वार्टर डेस्टिनेशन के तौर पर उभरना। मल्टीनेशनल कंपनियों को इस तेज़ी से बदलते इकोनॉमिक सिनेरियो में रेगुलेटरी डिमांड्स और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के बीच संतुलन बिठाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
